बड़ी खबर: युवती ने इस्लाम छोड़ अपनाया सनातन धर्म। वैदिक रीति से हुआ घरवापसी संस्कार

युवती ने इस्लाम छोड़ अपनाया सनातन धर्म। वैदिक रीति से हुआ घरवापसी संस्कार

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के चंडीघाट स्थित पावन ब्रह्मकुंड में शनिवार को एक युवती ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ सनातन धर्म स्वीकार किया।

घरवापसी संस्कार के बाद उसका नया नाम “नेहा” रखा गया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक अनुष्ठान, पुष्पवर्षा और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच नव-दीक्षित नेहा का सनातन परंपरा में स्वागत किया गया।

यह वैदिक संस्कार तीर्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अनुष्ठान का संचालन पंडित जितेंद्र ज्योति ने किया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के संरक्षक बाबा हठयोगी महाराज, दिल्ली आर्य समाज के मुकेश शास्त्री, विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री अर्जुन, पानब देव आश्रम के महंत ओमदास महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन में हिंदू रक्षा दल के जिलाध्यक्ष विशाल चौहान की भी सक्रिय भूमिका रही।

आयोजकों के अनुसार, युवती ने अपनी स्वेच्छा और व्यक्तिगत आस्था के आधार पर सनातन धर्म स्वीकार किया। घरवापसी संस्कार के उपरांत उसका नया नाम “नेहा” रखा गया और वैदिक परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

कार्यक्रम के दौरान बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में अनेक लोग भय, अत्याचार तथा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अपने मूल धर्म से दूर हो गए थे।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा और आस्था के आधार पर अपने पूर्वजों की परंपरा में लौटना चाहता है, तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाना चाहिए।

तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी भी प्रकार के बलपूर्वक मत परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा, श्रद्धा और वैदिक संस्कृति में विश्वास के आधार पर सनातन परंपरा को अपनाना चाहता है, तो उसका स्वागत करना धार्मिक और मानवीय दायित्व है। उन्होंने इसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश बताया।

महंत ओमदास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म प्रेम, करुणा, सत्य और अपनत्व का संदेश देता है। उन्होंने नव-दीक्षित नेहा को आशीर्वाद देते हुए समाज में सद्भाव, संस्कार और धार्मिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धार्मिक विश्वास और व्यक्तिगत निर्णय लेने की स्वतंत्रता तथा सम्मान मिलना चाहिए।