हाईकोर्ट में ‘वन बार–वन वोट’ पर बड़ी सुनवाई, जस्टिस सुभाष उपाध्याय को स्थायी जज बनाने की मंजूरी
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में बार एसोसिएशनों के चुनाव में लागू ‘वन बार–वन वोट’ व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड और प्रदेश की करीब 55 बार एसोसिएशनों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण खबर में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश जस्टिस सुभाष उपाध्याय को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
‘वन बार–वन वोट’ नियम पर उठे सवाल
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव नियम, 2014 के नियम 40 को चुनौती दी।
याचिका में कहा गया है कि “एक वर्ष में केवल एक बार मतदान” का प्रावधान ‘वन बार–वन वोट’ के मूल सिद्धांत से अलग एक अतिरिक्त समयगत प्रतिबंध लगाता है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि सभी बार एसोसिएशनों की अलग-अलग सदस्यता और मतदाता सूची तैयार की जाए तथा एक से अधिक बार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ताओं से शपथपत्र लेकर यह तय किया जाए कि वे किस बार एसोसिएशन के चुनाव में मतदान करेंगे।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि अधिकांश बार एसोसिएशनों का कार्यकाल दो वर्ष का होता है, जबकि मतदान संबंधी नियम एक वर्ष की सीमा तय करता है, जिससे व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।
सभी संबंधित पक्षों को नोटिस
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड और राज्य की लगभग 55 बार एसोसिएशनों को नोटिस जारी किए हैं। सभी पक्षों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
जस्टिस सुभाष उपाध्याय के स्थायी जज बनने का रास्ता साफ
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर 2026 की बैठक में उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश जस्टिस सुभाष उपाध्याय को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। कॉलेजियम की स्वीकृति के बाद अब उनकी स्थायी नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अल्मोड़ा से हाईकोर्ट तक का सफर
जस्टिस सुभाष उपाध्याय मूल रूप से अल्मोड़ा जिले की सल्ट तहसील के निवासी हैं। 12 दिसंबर 1972 को जन्मे जस्टिस उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और एमएसडब्ल्यू की शिक्षा प्राप्त की।
वर्ष 1998 में उन्होंने वकालत शुरू की और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ तथा उत्तराखंड हाईकोर्ट में सिविल, संवैधानिक और सेवा मामलों में लंबा अनुभव हासिल किया।
वे राज्य के मुख्य स्थायी अधिवक्ता सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उत्तराखंड हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सितंबर 2022 में उनके नाम की संस्तुति की थी, जिसके बाद अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी उनके नाम को मंजूरी दी।
अंततः 30 मई 2025 को उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की थी। अब कॉलेजियम की नई मंजूरी के बाद उनके स्थायी न्यायाधीश बनने का मार्ग लगभग साफ हो गया है।


