प्रभात ध्यानी की रिहाई पर सरकार से जवाब तलब, कॉर्बेट भ्रष्टाचार केस CBI कोर्ट ट्रांसफर
नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को दो अहम मामलों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। एक ओर जंतर-मंतर मार्च में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने के मामले में राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उन्हें रिहा कर दिया गया है।
वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण प्रकरण से जुड़े विजिलेंस के दो मामलों को हल्द्वानी से देहरादून स्थित विशेष सीबीआई अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
प्रभात ध्यानी प्रकरण में सरकार से जवाब तलब
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी रविवार को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से दिल्ली में सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे।
आरोप है कि इसी दौरान रामनगर पुलिस ने उन्हें ट्रेन से हिरासत में ले लिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की सूचना तक नहीं दी, जिससे पूरी रात उनकी तलाश की जाती रही।
पार्टी के महासचिव लालमणि की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।
न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि प्रभात ध्यानी को रिहा कर दिया गया है।
हालांकि अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि आखिर उन्हें किस कानूनी आधार पर हिरासत में लिया गया था। इस संबंध में राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
कॉर्बेट भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
इसी दिन हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कथित भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में सीबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए हल्द्वानी की विशेष अदालत में लंबित विजिलेंस के दो आपराधिक मामलों को देहरादून स्थित विशेष सीबीआई अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि सीबीआई पहले ही मामले की जांच पूरी कर विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ऐसे में समानांतर सुनवाई से अधिकार क्षेत्र के टकराव और प्रक्रियागत जटिलताएं पैदा होंगी।
अब ‘राज्य बनाम बृज बिहारी शर्मा’ और ‘राज्य बनाम किशन चंद’ मामलों की सुनवाई देहरादून स्थित विशेष भ्रष्टाचार निवारण (CBI) कोर्ट में होगी।
आठ अधिकारी हैं आरोपी
सीबीआई की चार्जशीट में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक राहुल, तत्कालीन डीएफओ किशन चंद, अखिलेश तिवारी समेत आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों पर वित्तीय अनियमितता, अवैध कटान, भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण कानूनों के उल्लंघन सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा।
हाईकोर्ट के इन दोनों मामलों को प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


