थानो जामा मस्जिद विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नए आवेदन पर 3 महीने में निर्णय लेगा MDDA
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून स्थित थानो जामा मस्जिद कमेटी की ओर से दायर याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया है। यह याचिका मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा कथित अनधिकृत निर्माण को सील करने और शमन (नियमितीकरण) आवेदन निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर की गई थी।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एमडीडीए को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को लिखित रूप में उन सभी आवश्यक दस्तावेजों और आपत्तियों की सूची उपलब्ध कराए, जिनके आधार पर आवेदन पर विचार किया जाना है।
शमन आवेदन पहले हो चुका था खारिज
मामले में मस्जिद कमेटी ने एमडीडीए के पीठासीन अधिकारी द्वारा 14 मई 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उत्तराखंड अर्बन एंड कंट्री प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 28ए के अंतर्गत निर्माण को सील करने के निर्देश दिए गए थे।
एमडीडीए की ओर से अदालत को बताया गया कि मस्जिद कमेटी ने निर्माण के नियमितीकरण के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन भूमि स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए गए थे। आवश्यक अभिलेखों के अभाव में 25 अप्रैल 2026 को आवेदन निरस्त कर दिया गया था।
नए आवेदन पर कानून के तहत होगा विचार
सुनवाई के दौरान एमडीडीए की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि यदि मस्जिद कमेटी सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नया आवेदन प्रस्तुत करती है, तो उस पर नियमानुसार पुनर्विचार किया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने भी अदालत को बताया कि कमेटी प्राधिकरण द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए नया आवेदन दाखिल करने को तैयार है।
तीन महीने में लेना होगा अंतिम निर्णय
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आवश्यक दस्तावेजों के साथ नया आवेदन जमा किए जाने के बाद एमडीडीए को तीन महीने के भीतर कानून के अनुरूप अंतिम निर्णय लेना होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हो तो याचिकाकर्ता भूमि उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) के लिए राज्य सरकार के समक्ष भी विधिसम्मत आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रखे पक्ष
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पैरवी की, जबकि एमडीडीए की ओर से अधिवक्ता राहुल कंसल ने अदालत के समक्ष प्राधिकरण का पक्ष रखा।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मस्जिद कमेटी के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ नया आवेदन प्रस्तुत करने का रास्ता खुल गया है, जबकि एमडीडीए को निर्धारित समयसीमा के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा।


