एक्सक्लूसिव: दिव्यांगजनों के नाम पर करोड़ों का खेल? RTI एक्टिविस्ट की शिकायत से मचा हड़कंप

दिव्यांगजनों के नाम पर करोड़ों का खेल? RTI एक्टिविस्ट की शिकायत से मचा हड़कंप

हल्द्वानी। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में दिव्यांगजनों के लिए संचालित एक प्रशिक्षण एवं कार्यशाला केंद्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है।

समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, उत्तराखंड दिव्यांगजन आयोग तथा विभिन्न सरकारी विभागों को शिकायत भेजकर केंद्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दिव्यांगजनों के प्रशिक्षण, पुनर्वास और स्वरोजगार के उद्देश्य से स्थापित केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद भवन निर्माण, किराया, रखरखाव, मरम्मत, मशीनों, उपकरणों और फर्नीचर के नाम पर सरकारी धन खर्च होता रहा।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि केंद्र संचालित नहीं हो रहा था तो इन मदों में खर्च की गई धनराशि का वास्तविक उपयोग कहां हुआ।

हेमंत गौनिया का आरोप है कि वर्षों से बंद पड़े केंद्र के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में खर्च दर्शाया जाता रहा, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका पैदा होती है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच, विशेष ऑडिट और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन की मांग की है।

शिकायत में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।

आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित विभागों से दस्तावेज और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड भी मांगे जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि पूरे मामले की परतें खोलने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे।

शिकायत में प्रमुख रूप से बंद पड़े केंद्र की उच्चस्तरीय जांच, सरकारी धन के उपयोग की ऑडिट, भवन किराया और निर्माण कार्यों की वित्तीय समीक्षा, मशीनों एवं उपकरणों का भौतिक सत्यापन तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

फिलहाल शिकायत संबंधित विभागों तक पहुंच चुकी है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रशासन या संबंधित विभागों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ऐसे में जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला राज्य में दिव्यांग कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।