स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशे के खिलाफ बड़ी कानूनी पहल, सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज
नई दिल्ली। देशभर में स्कूलों और कॉलेजों के आसपास बढ़ते नशे के कारोबार, ऑनलाइन शराब सप्लाई और अवैध ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ उठाई गई आवाज अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है।
समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए शिकायती पत्र पर Supreme Court of India ने आधिकारिक संज्ञान लेते हुए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के PIL (English) Cell और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, हेमंत गौनिया की शिकायत को जनहित याचिका प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया है।
शिकायत में विशेष रूप से उत्तराखंड सहित देशभर में शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री, ऑनलाइन शराब डिलीवरी और अवैध ड्रग्स कारोबार को गंभीर सामाजिक खतरा बताते हुए कठोर कानून और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
Inward नंबर के साथ दर्ज हुई याचिका
सुप्रीम कोर्ट के अतिरिक्त रजिस्ट्रार एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी S.K. Kamesh Nookala द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि हेमंत सिंह गौनिया की पत्र-याचिका 19 जनवरी 2026 को प्राप्त हुई थी। इसे Inward No. 42937/SCI/PIL(E)/2026 के रूप में PIL (English) Section में दर्ज किया गया।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी जनहित याचिकाओं की जांच सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित PIL Guidelines के अनुसार की जाती है तथा मामले की स्थिति न्यायालय की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जाती है।
फाइल नोटिंग में दर्ज हुई गंभीर टिप्पणी
RTI के माध्यम से प्राप्त सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक फाइल नोटिंग में उल्लेख किया गया,
“Complaining in form of suggestion regarding strict laws and Judicial intervention to effectively stop the sale of intoxicants, online liquor supply and illegal drug trade around educational institutions in Uttarakhand.”
यानी शिकायत में शिक्षण संस्थानों के आसपास नशे और ऑनलाइन शराब बिक्री को रोकने के लिए सख्त कानून एवं न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
इसके बाद PIL(E) सेल के डीलिंग असिस्टेंट ने फाइल पर टिप्पणी करते हुए लिखा– “If so approved the above letter petition may be lodged.”
इसके बाद फाइल क्रमशः Branch Officer (PIL-E), Deputy Registrar (PIL-E) और Registrar (PIL-E) के समक्ष प्रस्तुत की गई, जहां अधिकारियों द्वारा अनुमोदन और हस्ताक्षर किए गए।
“युवाओं के भविष्य को बचाने की लड़ाई”
समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि उत्तराखंड समेत पूरे देश में युवाओं को तेजी से नशे के जाल में धकेला जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों के आसपास खुलेआम नशीले पदार्थों की उपलब्धता तथा ऑनलाइन शराब सप्लाई बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल उत्तराखंड की नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस गंभीर मुद्दे पर सख्त दिशा-निर्देश जारी करेगा।
अब सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले के सामने आने के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं
- क्या स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशे के कारोबार पर राष्ट्रीय स्तर पर सख्त कार्रवाई होगी?
- क्या ऑनलाइन शराब बिक्री के लिए नई निगरानी व्यवस्था बनेगी?
- क्या राज्यों को कठोर कानून बनाने के निर्देश दिए जाएंगे?
- इन सवालों के जवाब अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्रवाई से तय होंगे।

