एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड में हाई अलर्ट पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां। जानिए क्यों?…

उत्तराखंड में हाई अलर्ट पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां। जानिए क्यों?…

देहरादून। उत्तराखंड इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहा है। एक ओर पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, तो दूसरी ओर तेजी से बढ़ते साइबर अपराध आम लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं।

कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत नैनीताल जिले में एसएसबी और सीएपीएफ की दो कंपनियां तैनात की गई हैं।

पर्यटन सीजन और धार्मिक यात्राओं में बढ़ती भीड़ को देखते हुए हल्द्वानी, नैनीताल, भीमताल समेत प्रमुख पर्यटन स्थलों और यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

सुरक्षा बल लगातार चेकिंग अभियान चला रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को भी सक्रिय कर दिया गया है।

नैनीताल एसएसपी मंजूनाथ टीसी के मुताबिक आने वाले दिनों में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं में भारी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

कुमाऊं मंडल से आदि कैलाश यात्रा शुरू हो चुकी है, जबकि जून से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी प्रारंभ होनी है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

इधर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट ने उत्तराखंड में अपराध की बदलती तस्वीर भी सामने रखी है।

रिपोर्ट के मुताबिक हत्या, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। वर्ष 2024 में राज्य में साइबर अपराधों में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिनमें करीब 70 फीसदी मामले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए।

पुलिस और साइबर सेल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रदेश में करीब 90 हजार लोग साइबर ठगी का शिकार हुए। इस दौरान साइबर अपराधियों ने करीब 468 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

केवल वर्ष 2024 में ही 133 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी दर्ज की गई। यानी औसतन हर दिन लगभग 46 लाख रुपये लोगों के खातों से गायब हुए।

उत्तराखंड एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह के मुताबिक “डिजिटल अरेस्ट” इस समय सबसे खतरनाक साइबर हथियार बन चुका है। साइबर अपराधी खुद को CBI, ED, पुलिस, कस्टम या TRAI अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

पिछले तीन वर्षों में ऐसे 43 मामलों में करीब 30 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग, कारोबारी और नौकरीपेशा लोग बने हैं।

प्रदेश में ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग फ्रॉड, फर्जी लोन ऐप, KYC अपडेट, OTP शेयरिंग, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और फर्जी कस्टमर केयर कॉल जैसे मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया और मोबाइल एप के जरिए लोगों का डाटा जुटाकर उन्हें निशाना बना रहे हैं।

हालांकि NCRB रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 1.5 प्रतिशत की कमी और हत्या, लूट व डकैती जैसे गंभीर अपराधों में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पुलिस मुख्यालय का दावा है कि महिला हेल्प डेस्क, त्वरित कार्रवाई और विशेष अभियानों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।

साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच उत्तराखंड पुलिस की डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था को बड़ी उपलब्धि भी मिली है।

स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल डाटा प्रबंधन में राज्य ने देशभर में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वन डाटा वन एंट्री सिस्टम, CCTNS और इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के प्रभावी संचालन में उत्तराखंड को 93.46 अंक प्राप्त हुए हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक, वीडियो कॉल या निवेश योजना पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।