दिल्ली हाईकोर्ट के पांच महत्वपूर्ण फैसलें। एक क्लिक में पढ़ें….
नई दिल्ली। Delhi High Court ने सोमवार को कई महत्वपूर्ण मामलों में अलग-अलग सुनवाई करते हुए अहम फैसले और टिप्पणियां दीं।
केजरीवाल मामले में CBI का विरोध, फैसला सुरक्षित
Central Bureau of Investigation (CBI) ने Arvind Kejriwal द्वारा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को शराब नीति मामले की सुनवाई से हटाने की मांग का विरोध किया।
सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कहा कि ऐसी मांग स्वीकार करना “गलत मिसाल” बनेगा और इससे पक्ष अपनी पसंद की बेंच चुनने लगेंगे। वहीं, केजरीवाल ने निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई। कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
नाबालिग अश्लील सामग्री मामले में सख्ती
हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग की अश्लील तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर डालना “बेहद गंभीर अपराध” है। कोर्ट ने माना कि इससे पीड़िता की गरिमा, निजता और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है। इसी आधार पर आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
मंत्रियों को रोज़ जनता से जुड़ने का आदेश देने से इनकार
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश देने से इनकार कर दिया कि सभी मंत्री रोज़ाना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनता की शिकायतें सुनें। कोर्ट ने कहा कि यह नीति निर्धारण का विषय है और इसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
अंडरट्रायल कैदियों को राहत देने के निर्देश
कोर्ट ने कहा कि जिन कैदियों ने संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, उन्हें राहत दी जानी चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया।
जज पर पक्षपात के आरोप पर सख्त रुख
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल प्रतिकूल आदेश के आधार पर जज पर पक्षपात का आरोप लगाना या केस ट्रांसफर की मांग करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोपों के लिए ठोस आधार होना जरूरी है।
इन सभी अलग-अलग मामलों में दिए गए फैसलों से यह स्पष्ट हुआ कि अदालत एक ओर न्यायिक निष्पक्षता को प्राथमिकता दे रही है, वहीं कानून के दुरुपयोग और बेबुनियाद आरोपों पर सख्त रुख भी अपना रही है।



