सुप्रीम कोर्ट सख्त। बाल तस्करी पर राज्यों को चेतावनी, मेरठ में 44 अवैध इमारतें सील करने का आदेश
नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने एक साथ दो अहम मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों और प्रशासनिक तंत्र को कड़ा संदेश दिया है।
पहले मामले में अदालत ने बच्चों की तस्करी को लेकर गंभीर चिंता जताई। जस्टिस J.B. Pardiwala और जस्टिस K.V. Viswanathan की खंडपीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से साफ कहा कि वे इस समस्या को हल्के में न लें। कोर्ट ने कहा कि देशभर में तस्करी के गिरोह सक्रिय हैं और हालात “बेकाबू” होते जा रहे हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पर प्रभावी कार्रवाई केवल राज्य सरकार, गृह विभाग और पुलिस तंत्र ही कर सकते हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों को 15 अप्रैल 2025 के आदेशों के पालन का अंतिम मौका देते हुए 18 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
कोर्ट ने यह भी सख्त निर्देश दिया कि,
- लापता बच्चों के मामलों को मानव तस्करी मानकर जांच शुरू की जाए।
- एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को मजबूत किया जाए।
- लंबित मामलों का छह महीने में निपटारा किया जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कई राज्यों ने न तो तय प्रारूप में रिपोर्ट दाखिल की और न ही समीक्षा समितियां बनाई हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि यदि समय सीमा तक रिपोर्ट नहीं दी गई तो राज्यों को “डिफॉल्टर” माना जाएगा।
दूसरे अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Meerut में अवैध निर्माण पर कड़ा एक्शन लेते हुए 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का आदेश दिया।
अदालत ने पाया कि रिहायशी प्लॉट्स को बिना अनुमति दुकानों, स्कूलों और अस्पतालों में बदल दिया गया था। इन इमारतों में न तो स्वीकृत नक्शे थे और न ही फायर सेफ्टी के इंतजाम।
कोर्ट ने पूर्व मेरठ मंडल आयुक्त Rishikesh Bhaskar Yashod को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने “जनता के विरोध” के नाम पर अदालत के आदेशों की अनदेखी की, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
अदालत ने सख्त निर्देश दिए कि,
- सभी अवैध इमारतों को तुरंत सील किया जाए
- वहां चल रहे स्कूल और अस्पताल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किए जाएं
- किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि बिना वैधता जांच के इन इमारतों को बिजली कनेक्शन और बैंक सुविधाएं कैसे मिल गईं।
दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ है। चाहे बच्चों की तस्करी हो या अवैध निर्माण, लापरवाही और ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने राज्यों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि कानून का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।



