बिग ब्रेकिंग: टिहरी में वन्यजीव हमला और प्रदेश में वनाग्नि अलर्ट। 8 नोडल अधिकारी नियुक्त

टिहरी में वन्यजीव हमला और प्रदेश में वनाग्नि अलर्ट। 8 नोडल अधिकारी नियुक्त

-ब्यूरो रिपोर्ट
देहरादून। उत्तराखंड में एक ओर मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गर्मी के साथ वनाग्नि का खतरा भी गहराने लगा है।

टिहरी गढ़वाल के थौलधार ब्लॉक में भालू के हमले में ग्राम प्रधान समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि वन विभाग ने संभावित जंगल की आग से निपटने के लिए प्रदेशभर में नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी है।

टिहरी गढ़वाल के चंबा-धरासू मोटर मार्ग पर सुल्याधार के पास थापली तोक में गुरुवार को भालू ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में ग्राम प्रधान बेरगणी युद्धवीर सिंह रावत, फॉरेस्टर अजयपाल पंवार और विनोद सिंह रावत गंभीर रूप से घायल हो गए।

तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि ये सभी ग्रामीणों के साथ भालू की गतिविधियों का जायजा लेने पहुंचे थे, तभी पहले से मौजूद भालू ने हमला कर दिया। कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में एक महिला पर भी भालू हमला कर चुका है।

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।

उनका आरोप है कि विभाग को पहले ही भालू की सूचना दे दी गई थी, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। घायल ग्राम प्रधान ने भी डीएफओ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनै ने भी मामले में कार्रवाई की मांग की है।

इधर, वनाग्नि के बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इन अधिकारियों को जंगलों में आग की घटनाओं की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है।

वनाग्नि के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी और उनके जिले:

  • विवेक पांडे (अपर प्रमुख वन संरक्षक) – अल्मोड़ा
  • सुरेंद्र मेहरा (अपर प्रमुख वन संरक्षक) – पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार
  • मीनाक्षी जोशी (अपर प्रमुख वन संरक्षक) – पिथौरागढ़
  • संजीव चतुर्वेदी (मुख्य वन संरक्षक) – नैनीताल, उधम सिंह नगर
  • पीके पात्रो (मुख्य वन संरक्षक) – टिहरी गढ़वाल, देहरादून
  • राहुल (मुख्य वन संरक्षक स्तर) – उत्तरकाशी
  • बीजू लाल (मुख्य वन संरक्षक स्तर) – चंपावत, बागेश्वर
  • विनय भार्गव (वन संरक्षक) – रुद्रप्रयाग, चमोली

वन विभाग के अनुसार, हर साल 15 फरवरी से शुरू होने वाला फॉरेस्ट फायर सीजन इस बार शुरुआती दौर में बारिश के कारण शांत रहा, लेकिन मार्च समाप्त होते ही तापमान बढ़ने की संभावना ने चिंता बढ़ा दी है।

अप्रैल और मई में सूखी पत्तियों और घास (फ्यूल लोड) के कारण आग लगने और तेजी से फैलने का खतरा अधिक रहता है।

विभाग का दावा है कि इस बार वनाग्नि से निपटने के लिए आधुनिक उपकरण, मॉनिटरिंग सिस्टम और कर्मचारियों के बीमा जैसी व्यवस्थाएं पहले से बेहतर की गई हैं। नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फील्ड विजिट कर स्थिति की निगरानी करें और हर महीने मुख्यालय को रिपोर्ट भेजें।

प्रदेश में एक साथ उभरती ये दोनों चुनौतियां वन्यजीवों का आबादी की ओर बढ़ना और वनाग्नि का खतरा प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा बनती जा रही हैं। ऐसे में त्वरित कार्रवाई और मजबूत रणनीति ही इन समस्याओं से निपटने का एकमात्र रास्ता मानी जा रही है।