देहरादून रायपुर थाना कस्टडी डेथ केस में जवान की मौत पर सस्पेंशन, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
देहरादून। रायपुर थाना में पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) जवान सुनील रतूड़ी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
मामले में अब तक एक सब-इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया है, जबकि एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन अटैच किया गया है। वहीं, पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच मजिस्ट्रेट द्वारा कराए जाने के आदेश दे दिए गए हैं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ‘फांसी’ की पुष्टि, विसरा सुरक्षित
देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण फांसी बताया गया है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता और परिजनों की शंका को देखते हुए विसरा सुरक्षित रखकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
क्या है पूरा मामला?
28 मार्च की रात पुलिस को 112 के जरिए सूचना मिली थी कि रायपुर क्षेत्र के लाडपुर स्थित एक पेट्रोल पंप पर एक व्यक्ति शराब के नशे में हंगामा कर रहा है और भुगतान से इनकार कर रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर रायपुर थाने की हवालात में बंद कर दिया।
कुछ घंटे बाद वही व्यक्ति जो कि पीआरडी जवान सुनील रतूड़ी निकला हवालात में बेहोशी की हालत में मिला। पुलिस का दावा है कि उसने कंबल/चादर से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। उसे तुरंत कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप: ‘हिरासत में हत्या’
मृतक के परिजनों ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए इसे कस्टडी डेथ (हिरासत में मौत) बताया है। उनका कहना है कि,
- थाने के अंदर किसी व्यक्ति की मौत गंभीर सवाल खड़े करती है
- पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए
- घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय हो
- घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखा गया।
एसएसपी का एक्शन: सस्पेंशन और लाइन अटैचमेंट
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने त्वरित कार्रवाई की है:
- डालनवाला थाने से ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह को निलंबित किया गया।
- रायपुर थाने के एसएचओ समेत 4 पुलिसकर्मी पुलिस लाइन अटैच किए गए
- एसएसपी ने स्पष्ट किया कि लापरवाही या अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब आगे क्या?
- मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच
- विसरा रिपोर्ट से मौत के कारण की पुष्टि
- जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर आगे की कार्रवाई संभव
बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर पुलिस हिरासत में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजरें न्यायिक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले की सच्चाई सामने लाएगी।




