इधर पुलिस कस्टडी में युवक की मौत, उधर अंकिता भंडारी को लेकर सड़क पर उतरे लोग
देहरादून। उत्तराखंड में एक तरफ हरिद्वार के सिडकुल थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में एक आरोपी की संदिग्ध मौत ने पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं दूसरी ओर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनता का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। दोनों घटनाओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।
हरिद्वार में सीजेएम कोर्ट से जुड़ी जमानत प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मामले में पुलिस ने चार संदिग्धों को हिरासत में लिया था। जांच में सामने आया कि ये लोग पेशेवर जमानती के रूप में काम कर रहे थे।
इसी दौरान हिरासत में लिए गए एक आरोपी नरेश की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।
इधर देहरादून में अंकिता भंडारी केस को लेकर लोगों का आक्रोश फिर भड़क उठा है। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी के यमुना कॉलोनी स्थित आवास का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग कर रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाते हुए मांग की कि जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए और कथित वीआईपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
संघर्ष मंच की सदस्य कमला पंत ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई है और प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने भी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
गौरतलब है कि 2022 में सामने आए इस हत्याकांड में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के आरोप में तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी एंगल को लेकर विवाद अब भी जारी है।
हरिद्वार कस्टडी डेथ और अंकिता भंडारी केस में जारी विरोध दोनों घटनाएं यह संकेत देती हैं कि उत्तराखंड में न्याय और जवाबदेही को लेकर जनता का भरोसा चुनौती के दौर से गुजर रहा है।




