बिग ब्रेकिंग: दून स्मार्ट सिटी में करोड़ों की गड़बड़ी, बिना टेंडर काम और वसूली न होने पर कैग ने उठाए सवाल

दून स्मार्ट सिटी में करोड़ों की गड़बड़ी, बिना टेंडर काम और वसूली न होने पर कैग ने उठाए सवाल

देहरादून: देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में बिना टेंडर करोड़ों के काम कराए जाने,

ठेकेदारों से रिकवरी न होने और कई परियोजनाओं के उपयोग में न आने जैसी खामियां सामने आई हैं।

कैग ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए कार्यों का ऑडिट किया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2.93 करोड़ रुपये के काम बिना टेंडर प्रक्रिया के कराए गए, जो नियमों का उल्लंघन है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ब्रिज एंड रूफ कंपनी (इंडिया) लिमिटेड के साथ 2019 में स्मार्ट रोड, सीवरेज और ड्रेनेज कार्यों के लिए एमओयू किया गया था, जिसके तहत 76.84 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

लेकिन काम में देरी और अव्यवस्था के कारण सितंबर 2022 में कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया। इसके बावजूद कंपनी द्वारा खर्च न किए गए 19.06 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की गई, जिस पर कैग ने सवाल उठाए हैं।

कैग के अनुसार, परेड ग्राउंड जीर्णोद्धार परियोजना में भी लापरवाही सामने आई। अक्टूबर 2019 में 18.92 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था, जिसे अक्टूबर 2020 तक पूरा होना था,

लेकिन फरवरी 2023 तक भी कार्य पूरा नहीं हुआ। अनुबंध समाप्त होने के बावजूद 1.41 करोड़ रुपये का जुर्माना ठेकेदार से नहीं वसूला गया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कई योजनाओं पर खर्च के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो सका। ठोस कूड़ा प्रबंधन की निगरानी के लिए 4.55 करोड़ रुपये की बायोमेट्रिक और सेंसर प्रणाली विकसित की गई,

लेकिन फरवरी 2025 तक इसे लागू नहीं किया गया। वहीं 90 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए ई-रिक्शा दो साल तक संचालित ही नहीं हुए।

इसके अलावा 2.06 करोड़ रुपये के पर्यावरण सेंसर, 3.24 करोड़ रुपये की मल्टी यूटिलिटी डक्ट और स्कूलों में लगाए गए 5.91 करोड़ रुपये के स्मार्ट उपकरण भी प्रभावी रूप से उपयोग में नहीं आ सके।

कैग ने यह भी पाया कि परियोजना प्रबंधन सलाहकार के भुगतान में 5.19 करोड़ रुपये की अनियमितता, माडर्न दून लाइब्रेरी परियोजना में 24.70 लाख रुपये का अधिक भुगतान और चकराता रोड स्मार्ट रोड परियोजना में 19.47 करोड़ रुपये का अनियमित व्यय किया गया।

साथ ही 2017-18 से 2020-21 के बीच दो चालू खातों में धनराशि जमा रखने से 6.2 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान भी हुआ।

गौरतलब है कि देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। वर्ष 2023 तक 737 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिनमें से 634.11 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब परियोजना की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।