ईरान में फंसे देहरादून के परिवार, 30 सेकंड की कॉल से मिल रही उम्मीद
देहरादून। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच उत्तराखंड के कई परिवार गहरी चिंता में हैं. खासकर देहरादून के अंबाड़ी गांव के लोग,
जिनके परिजन इस समय ईरान में फंसे हुए हैं. हालात इतने खराब हैं कि परिवारों को अपने अपनों की खैरियत जानने के लिए सिर्फ कुछ सेकंड की फोन कॉल का ही सहारा मिल रहा है.
अंबाड़ी गांव निवासी जाकिर हुसैन की बेटी इस्लामी अध्ययन के लिए ईरान गई हुई है. उनके साथ दामाद भी वहीं हैं. इसके अलावा हुसैन के भाई,
भाभी और अन्य रिश्तेदार भी ईरान में मौजूद हैं. जाकिर हुसैन ने बताया कि हालात बिगड़ने के बाद से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है.
उन्होंने बताया कि बुधवार रात बेटी का फोन आया था, लेकिन मुश्किल से 30 सेकंड ही बात हो पाई. बेटी ने बस इतना कहा, “फिक्र मत कीजिए, हम ठीक हैं,” और फिर कॉल कट गई. उसके बाद से फोन बंद आ रहा है.
जाकिर हुसैन ने बताया कि उनकी पत्नी पहले से ही घबराहट की मरीज हैं, इसलिए वह उन्हें वहां की पूरी स्थिति भी नहीं बता पा रहे हैं. उन्हें डर है कि सच बताने पर उनकी तबीयत और खराब हो सकती है.
वहीं अंबाड़ी गांव के ही अयूब खान के परिवार के सदस्य भी ईरान में फंसे हुए हैं. अयूब के भतीजे और उसकी पत्नी पिछले चार साल से तेहरान में इस्लामी अध्ययन कर रहे हैं.
अयूब खान ने बताया कि बुधवार रात उनके भतीजे का फोन आया था, जिसने बताया कि वह तेहरान से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित छात्रावास में सुरक्षित हैं.
हालांकि परिवारों का कहना है कि डर अभी भी बना हुआ है, क्योंकि हालात कभी भी बदल सकते हैं. परिजनों ने यह भी बताया कि उनकी समस्या अब तक केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय तक ठीक से नहीं पहुंच पाई है.
जाकिर हुसैन के मुताबिक, स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के अधिकारी एक बार गांव आए थे और उन्होंने परिजनों से नाम,
पता और पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी ली थी. लेकिन उसके बाद प्रशासन की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया.
अब अंबाड़ी गांव के ये परिवार सरकार से अपील कर रहे हैं कि ईरान में फंसे उनके परिजनों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं.
गांव के कई घर इन दिनों हर दिन एक उम्मीद के साथ गुजर रहे हैं कि शायद आज अपनों का फोन आए और उनकी सलामती की खबर मिले.



