पहाड़ों पर बर्फबारी का अलर्ट। केदारनाथ बर्फ से ढका, ओम पर्वत पर दिखे दो ॐ
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। प्रदेश में संभावित अर्नब साइक्लोन के असर के बीच मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश, बर्फबारी, ओलावृष्टि और तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। वहीं, मौसम के बदले मिजाज का असर केदारनाथ धाम से लेकर सीमांत पिथौरागढ़ की व्यास घाटी तक दिखाई दे रहा है।
केदारनाथ धाम में लगातार बर्फबारी से चारों ओर सफेद चादर बिछ गई है, जबकि ओम पर्वत पर इस बार प्रकृति का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है। यहां बर्फ से बनी एक नहीं, बल्कि दो ॐ जैसी आकृतियां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
कई जिलों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और चम्पावत जनपदों में अनेक स्थानों पर, जबकि शेष जनपदों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है।
3200 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं। नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चम्पावत में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की आशंका है। प्रदेश के अन्य जनपदों में भी गरज के साथ बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि कहीं-कहीं 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसे देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
देहरादून में भी बारिश और तेज हवाओं के आसार
राजधानी देहरादून में आसमान आंशिक से लेकर आमतौर पर बादलों से घिरा रहेगा। कुछ स्थानों पर गरज के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।
अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। बीते रोज प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे ठंड बढ़ गई है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने की अपील की है।
आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, काश्तकारों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा गया है।
बर्फ की सफेद चादर से ढकी केदारपुरी
दूसरी ओर, रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ धाम में 24 घंटे से अधिक समय से बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है।
लगातार हो रही बर्फबारी के चलते पूरी केदारपुरी ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। मंदिर परिसर से लेकर आसपास की पहाड़ियां और ऊंची चोटियां बर्फ से ढक गई हैं। बर्फबारी के बाद केदारनाथ धाम का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बन रहा है।
लगातार बदल रहे मौसम के कारण तापमान में भारी गिरावट आई है और ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। धाम में मौजूद कर्मचारियों, पुलिस जवानों और व्यवस्थाओं में जुटे कार्मिकों को भी विषम मौसमी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, धाम पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए भी मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बीकेटीसी सदस्य विनीत पोस्ती के मुताबिक केदारनाथ धाम में 24 घंटे से अधिक समय से बारिश और बर्फबारी जारी है।
उन्होंने मौसम के बदले मिजाज और बढ़ती ठंड को देखते हुए श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु पर्याप्त गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री साथ लेकर आएं, ताकि प्रतिकूल मौसम में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उल्लेखनीय है कि आगामी 11 नवंबर को भैयादूज पर्व पर विधि-विधान के साथ भगवान केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।
इसके बाद बाबा केदार की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी। अगले छह माह तक बाबा केदार की शीतकालीन पूजा-अर्चना यहीं संपन्न होगी।
ओम पर्वत पर एक साथ दिखीं दो ॐ की आकृतियां
मौसम में बदलाव और समय से पहले हुई बर्फबारी का एक अद्भुत नजारा सीमांत पिथौरागढ़ जिले की चीन सीमा से सटी व्यास घाटी में भी देखने को मिल रहा है।
यहां स्थित पवित्र ओम पर्वत पर बर्फ से बनी दो ॐ जैसी आकृतियां उभर आई हैं। प्रकृति के इस अनूठे नजारे ने आदि कैलाश यात्रा पर पहुंचे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
आमतौर पर ओम पर्वत की ढलान पर बर्फ के प्राकृतिक जमाव से एक ही ॐ की आकृति दिखाई देती है, लेकिन इस बार मुख्य आकृति के ठीक पास दूसरी ॐ जैसी आकृति भी नजर आ रही है।
श्रद्धालु इसे आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम मान रहे हैं। कई यात्रियों के लिए यह जीवन में पहली बार एक साथ दो ॐ की आकृतियां देखने का अनुभव बन गया है।
समय से पहले बर्फबारी से उभरा दुर्लभ नजारा
सामान्य तौर पर इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में नवंबर के आसपास भारी हिमपात की शुरुआत होती है, लेकिन इस वर्ष सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्टूबर में हुई बर्फबारी के कारण ओम पर्वत पर यह दृश्य समय से पहले ही स्पष्ट हो गया।
नई बर्फ जमने से मुख्य ॐ की आकृति और अधिक निखरकर सामने आई है, जबकि उसके पास दूसरी आकृति भी दिखाई देने लगी है।
पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में नाभीढांग के समीप स्थित ओम पर्वत धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश यात्रा मार्ग के प्रमुख आकर्षणों में शामिल इस पर्वत की ढलान पर बर्फ प्राकृतिक रूप से ॐ का आकार ले लेती है।
हिंदू धर्म में ॐ को अत्यंत पवित्र प्रतीक और ब्रह्मांड की प्रथम ध्वनि माना जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां के दर्शन विशेष आध्यात्मिक महत्व रखते हैं।
हालांकि, हिमालयी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। बर्फबारी, तापमान और हवाओं की परिस्थितियों के अनुसार पर्वत पर बनने वाली आकृतियों में भी बदलाव हो सकता है। ऐसे में ओम पर्वत पर एक साथ दिखाई दे रही दो ॐ की आकृतियां कितने समय तक बनी रहेंगी, यह आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में बदलता मौसम जहां पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड और दुश्वारियां बढ़ा रहा है, वहीं केदारनाथ की बर्फ से ढकी वादियां और ओम पर्वत पर दिखाई दे रही दो ॐ की आकृतियां प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य की तस्वीर पेश कर रही हैं।



