ज्योलीकोट में पानी के सभी सैंपल फेल, 3 मौतों के बाद थर्ड पार्टी जांच पर टिकी निगाहें
हल्द्वानी। नैनीताल जिले के ज्योलीकोट ब्लॉक में दूषित पेयजल से फैली महामारी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की शुरुआती जांच में 8 सितंबर को लिए गए सभी 9 पानी के नमूने फेल पाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार किसी भी स्थान का पानी पीने योग्य नहीं था और सभी नमूनों में बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है। इस बीच महामारी से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 250 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ज्योलीकोट, बेलुवाखान, सरियाताल और चोपड़ा क्षेत्र के विभिन्न जल स्रोतों और टंकियों से नमूने एकत्र किए थे। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि सभी 9 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
कुछ नमूनों में मानव मल-मूत्र से जुड़े प्रदूषण के संकेत मिले, जबकि कुछ में पशुओं के मल-मूत्र के मिश्रण की पुष्टि होने की बात कही गई है। इससे जल संस्थान की शुरुआती रिपोर्ट और PCB की जांच के निष्कर्षों में बड़ा अंतर भी सामने आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए PCB ने 10 सितंबर को प्रभावित क्षेत्रों से 17 और नमूने लिए। इसके बाद 11 सितंबर को ग्राम प्रधानों की मौजूदगी में 7 अतिरिक्त सैंपल भी एकत्र किए गए।
इस तरह अब कुल 24 नमूनों की जांच थर्ड पार्टी लैब से कराई जा रही है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। PCB के क्षेत्रीय प्रबंधक अनुराग नेगी के अनुसार अंतिम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ज्योलीकोट ब्लॉक के कई गांवों में पिछले कुछ समय से उल्टी-दस्त, डायरिया, पीलिया और टायफाइड के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे लंबे समय से बदबूदार और दूषित पानी की शिकायत करते रहे, लेकिन संबंधित विभागों ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। परिणामस्वरूप बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया।
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जल संस्थान के अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास स्थित जल स्रोत में सीवर का पानी मिल जाने से स्थिति बिगड़ी। बताया गया कि दुर्गापुर पेयजल संयंत्र के ऊपर बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से रिसाव होकर गंदा पानी मुख्य पेयजल लाइन में पहुंच रहा था।
इस पर कोर्ट ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि यदि विभागीय लापरवाही से बीमारी फैली है तो उसके उपचार और राहत की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों की होगी।
फिलहाल प्रभावित गांवों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी व उपचार में जुटी हैं।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि दूषित पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार कौन है और उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी, जिनकी कथित लापरवाही के चलते सैकड़ों लोग बीमार पड़े और तीन लोगों की जान चली गई।


