खास खबर: बारिश-बाढ़ और भूस्खलन की मार। पहाड़ में बढ़ीं मुश्किलें, कई इलाकों में हाई अलर्ट

बारिश-बाढ़ और भूस्खलन की मार। पहाड़ में बढ़ीं मुश्किलें, कई इलाकों में हाई अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने कई क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। बागेश्वर के मनगढ़ गांव में आपदा प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर स्थानीय विधायक फकीर राम टम्टा मौके पर पहुंचे, वहीं मसूरी में कैमल बैक रोड को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के खतरे के कारण बंद कर दिया गया है।

दूसरी ओर नेपाल के दार्चुला जिले में हुए भारी भूस्खलन के बाद पिथौरागढ़ जिले में भी प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।

मनगढ़ गांव में आपदा की सूचना मिलते ही विधायक फकीर राम टम्टा शनिवार को प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके से ही जिलाधिकारी को फोन कर गांव के विस्थापन, प्रभावितों को मुआवजा तथा तत्काल राहत उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग की।

विधायक ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामीणों ने भी उन्हें अपनी परेशानियों से अवगत कराते हुए शीघ्र सुरक्षा उपाय करने की मांग की।

उधर मसूरी में अंबेडकर चौक से कैमल बैक रोड जाने वाले मार्ग पर कृष्णा पैलेस होटल के सामने सड़क का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया है।

सड़क के नीचे का आधार कमजोर होने से कभी भी बड़ा हिस्सा धंसने की आशंका है। सुरक्षा को देखते हुए नगर पालिका प्रशासन और पुलिस ने मार्ग को पूरी तरह बंद कर दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी है।

नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने मौके का निरीक्षण करते हुए कहा कि सड़क का बेस काफी हद तक खाली हो चुका है और किसी भी वाहन के गुजरने से बड़ा हादसा हो सकता है।

उन्होंने सड़क की खराब स्थिति के लिए क्षेत्र में बिछाई गई पेयजल पाइपलाइनों के रिसाव और जल निकासी व्यवस्था की खामियों को भी जिम्मेदार बताया। उनके अनुसार लगातार रिसाव से मिट्टी कमजोर होती गई, जिससे सड़क का आधार खोखला हो गया।

संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर पुनर्निर्माण और स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

इस बीच नेपाल के दार्चुला जिले के अपिहिमाल क्षेत्र में हुए बड़े भूस्खलन के कारण चमेलिया (चौलानी) नदी का प्रवाह आंशिक रूप से बाधित हो गया है। नदी में मलबा जमा होने से पानी रुकने और अस्थायी झील बनने की आशंका जताई जा रही है।

चमेलिया नदी आगे चलकर महाकाली (काली) नदी में मिलती है, जिससे पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती इलाकों में भी संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है।

पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने पुलिस, एसएसबी, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों को अलर्ट पर रखा है। झूलाघाट, कानड़ी, बलतड़ी और अन्य नदी किनारे बसे क्षेत्रों में जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी गई है। लोगों को नदी किनारे जाने और रात में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल भारतीय क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि लगातार बारिश के कारण नदी का बहाव पूरी तरह बाधित हुआ और बाद में अचानक मलबा टूटा, तो पानी का दबाव बढ़ने से सीमावर्ती क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। एहतियात के तौर पर संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

लगातार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रशासन राहत, बचाव और निगरानी कार्यों को तेज कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बनाए रखना