बिग ब्रेकिंग: 10 हजार करोड़ के SAGA-LUCC घोटाले पर ED का शिकंजा, 30 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज

10 हजार करोड़ के SAGA-LUCC घोटाले पर ED का शिकंजा, 30 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज

देहरादून। करीब 10 हजार करोड़ रुपये के LUCC-SAGA ग्रुप से जुड़े कथित पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है।

ED मुख्यालय, नई दिल्ली की टीम ने 13 से 16 अगस्त 2026 के बीच मुंबई और भोपाल में SAGA ग्रुप से जुड़े Sameer Agarwal और उसके सहयोगियों के कई आवासीय एवं व्यावसायिक ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी अभियान चलाया।

ED के मुताबिक, तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। एजेंसी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर, सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसियां और बैंक बैलेंस समेत कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों को फ्रीज किया। इसके अलावा नौ हाई-एंड वाहनों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया।

नकदी, विदेशी मुद्रा और करोड़ों का सोना-चांदी बरामद

तलाशी के दौरान ED ने 1.53 करोड़ रुपये की नकदी, करीब 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा तथा लगभग 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और सिल्वर बुलियन जब्त किए।

एजेंसी की कार्रवाई में निवेश और बैंकिंग से जुड़ी संपत्तियों के साथ-साथ नकदी और कीमती धातुओं का भी बड़ा भंडार सामने आया।

2009 से निवेश के नाम पर कथित खेल

ED के अनुसार जांच उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस द्वारा LUCC और उससे जुड़ी सहकारी समितियों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई।

आरोप है कि 2009 से SAGA ग्रुप ने Loni Urban Multi-State Credit & Thrift Co-operative Society (LUCC) और अन्य संबद्ध समितियों के जरिए लोगों को Recurring Deposit, Fixed Deposit और Monthly Income जैसी योजनाओं में निवेश के लिए आकर्षित किया।

निवेशकों को तीन से पांच साल में रकम दोगुनी या तीन गुनी करने का भरोसा दिया जाता था। इसके अलावा कार समेत कई तरह के आकर्षक उपहार देने का भी लालच दिया गया।

ED का आरोप है कि इन असाधारण रिटर्न के पीछे ऐसा कोई वास्तविक कारोबार नहीं था, जो इतनी बड़ी रकम के भुगतान को उचित ठहरा सके।

फर्जी बैंकिंग ढांचे से जुटाई गई 10 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम

जांच एजेंसी के मुताबिक कथित फर्जी बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अवास्तविक रिटर्न के वादों के जरिए SAGA ग्रुप ने जनता से 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई।

शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को भुगतान किया गया, लेकिन ED का आरोप है कि बाद में निवेश की बड़ी रकम को Sameer Agarwal और उसके सहयोगियों ने निजी ऐशो-आराम तथा एजेंटों और सहयोगियों को कमीशन देने के लिए डायवर्ट किया।

कैश-चेस्ट, हवाला और 50 से ज्यादा शेल कंपनियों का नेटवर्क

ED की जांच में कथित तौर पर रकम को इधर-उधर करने के लिए एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। एजेंसी के अनुसार जनता से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा नकद में लिया जाता था। इसे क्षेत्रीय कैश-चेस्ट के जरिए आगे भेजा जाता और फिर कथित तौर पर देश-विदेश में चल-अचल संपत्तियों में लगाया जाता था।

जांच में 50 से अधिक शेल कंपनियों का नेटवर्क भी सामने आने की बात ED ने कही है। एजेंसी के मुताबिक रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए शेल कंपनियों के साथ-साथ कथित हवाला चैनलों का भी इस्तेमाल किया गया।

SAGA ग्रुप का कथित मास्टरमाइंड देश से बाहर

ED ने Sameer Agarwal को SAGA ग्रुप का CMD और प्रमुख नियंत्रक बताया है। एजेंसी के अनुसार वह देश छोड़ चुका है और फरार है। मामले में ED पहले ही दो अलग-अलग Provisional Attachment Orders के जरिए संपत्तियों की अस्थायी कुर्की कर चुकी है।

वहीं, ग्रुप के प्रमुख पदाधिकारी Ravi Shankar Tiwari को ED ने 14 जुलाई 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने 24 जुलाई 2026 को मामले में Special Court के समक्ष Prosecution Complaint भी दाखिल की थी।

जांच जारी, आगे और कार्रवाई के संकेत

SAGA-LUCC मामले में ED की ताजा कार्रवाई के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये की निवेश राशि, शेल कंपनियों, नकदी नेटवर्क, हवाला चैनलों और देश-विदेश में संपत्तियों में निवेश से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।

ED की कार्रवाई से आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियों व संपत्तियों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।