पहाड़ में आफत का प्रहार! कहीं डोली में मरीज, कहीं टूटी सड़क, कहीं थमी यात्रा, तो कहीं उफनाईं नदियां
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं घायल और बीमार लोगों को आज भी डोली में कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ रहा है, तो कहीं सड़क बंद होने के बाद ग्रामीण पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर रास्ता पार करने को मजबूर हैं।
भारी बारिश से नदियां और बरसाती गदेरे उफान पर हैं, भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है और कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ है। इन हालात ने एक बार फिर प्रदेश की सड़क और आपदा प्रबंधन व्यवस्था के साथ-साथ दूरस्थ गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ओखलकांडा में घायल महिला को डोली से चार किलोमीटर ले गए ग्रामीण
नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र से सामने आई तस्वीर ने पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुविधा की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। एक घायल महिला को ग्रामीण डोली में रखकर करीब चार किलोमीटर दूर मोटर मार्ग तक ले गए। इसके बाद सड़क पर खड़े वाहन से महिला को हल्द्वानी के अस्पताल पहुंचाया गया।
सोशल मीडिया पर ऋषभ सिंह रावत की ओर से घायल महिला को डोली में ले जाने की तस्वीर साझा किए जाने के बाद सड़क सुविधा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोग क्षेत्र में मोटर मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं।
क्षेत्रीय आयुक्त दीपक रावत के अनुसार गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर रहने की आवश्यकता है, जबकि पैदल मार्गों को पीएमजीएसवाई के फेज-4 में प्रस्तावित किया जा रहा है।
उत्तराखंड गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी कई दुर्गम गांवों में गंभीर बीमारी, दुर्घटना या प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीजों को डोली या डांडी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
ओखलकांडा के देना गांव में लोगों को नजदीकी मोटर मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब नौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। महतोली समेत कई गांव आज भी सड़क सुविधा से दूर हैं। वहीं नैनीताल के रामगढ़ क्षेत्र में उमागढ़ मार्ग क्षतिग्रस्त होने से 200 से अधिक लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
भीमताल के मलुवाताल, बागेश्वर के कपकोट स्थित दुर्गम बीथि गांव और भीमताल-धारी क्षेत्र के बबियाड़ गांव समेत कई इलाकों में ग्रामीणों को आज भी कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है।
बारिश में उफना सोलानी, लक्सर में बाढ़ का खतरा
पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश का असर मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। लक्सर तहसील के हस्तमोली गांव में सोलानी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी तटबंध तक पहुंच गया। तेज कटाव के चलते गांव और सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया।
सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में एसडीआरएफ, पुलिस, सिंचाई और राजस्व विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। सिंचाई विभाग ने तटबंध की मरम्मत का कार्य कराया।
ग्रामीणों ने भी पेड़ों के तनों और मिट्टी की मदद से कटाव रोकने का प्रयास किया। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सूचना देने की अपील की है।
पन्याली नाला उफना, घंटों फंसे वाहन
अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र में मोहान के पास पन्याली नाला तेज बारिश के बाद अचानक उफान पर आ गया। तेज बहाव के कारण कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
पानी का बहाव कम होने के बाद प्रशासन की निगरानी में यातायात फिर शुरू कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में पन्याली नाला हर साल उफान पर आता है। लोगों ने यहां स्थायी समाधान की मांग की है।
मसूरी में सरकारी आवास में घुसा बोल्डर, पांच परिवारों में दहशत
मसूरी में लगातार बारिश के बीच एसडीएम कार्यालय परिसर स्थित सरकारी कर्मचारी आवासों पर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक गया। भारी बोल्डर एक कर्मचारी के आवास की दीवार तोड़कर कमरे में जा घुसा। गनीमत रही कि उस समय कमरे में कोई मौजूद नहीं था।
घटना के बाद परिसर में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों में दहशत है। पांच परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किए जाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों ने आवासों के ऊपर बने पानी के टैंक को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहाड़ी पर लगातार हो रहे भूस्खलन से यदि टैंक को नुकसान पहुंचा तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने भी मौके का निरीक्षण कर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की। एसडीएम राहुल आनंद ने स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक सहायता का भरोसा दिया।
मध्यमहेश्वर यात्रा अगले आदेश तक स्थगित
रुद्रप्रयाग में द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर धाम की यात्रा को प्रशासन ने अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। लगातार बारिश, भूस्खलन के खतरे और मधुगंगा नदी पर लकड़ी का पुल बहने के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
पुल बहने के बाद नदी पार करने के लिए ट्रॉली का इस्तेमाल किया जा रहा था। यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण ट्रॉली पर दबाव बढ़ गया था। वहीं तलसारी तोक से बनतोली तक पैदल मार्ग पर पहाड़ी कटिंग का काम भी चल रहा है।
लोक निर्माण विभाग ने ट्रॉली की मरम्मत और तकनीकी परीक्षण के लिए दो से तीन दिन का समय मांगा है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने श्रद्धालुओं से प्रशासन की अनुमति और ताजा सूचना के बिना यात्रा पर नहीं निकलने की अपील की है।
चमोली में आपदा के एक साल बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार
चमोली के नंदानगर घाट क्षेत्र में सितंबर 2025 की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पैदल मार्गों का पुनर्निर्माण अब तक पूरा नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी जारी है। बरसात में मौख गाड़ का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर इसे पार करना पड़ रहा है।
स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई जगह अभिभावक बच्चों को पीठ पर बैठाकर उफनते गदेरे को पार कराते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पैदल पुल और क्षतिग्रस्त रास्तों के पुनर्निर्माण की मांग की जा चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।
पोकलैंड की बकेट में बैठकर सड़क पार करने को मजबूर ग्रामीण
चमोली के देवाल-वाण मोटर मार्ग पर गामरी गाड़ के पास भूस्खलन के कारण सड़क पर मलबा, बोल्डर और दलदल जमा हो गया है। मार्ग बंद होने से करीब आठ हजार की आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीण पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर सड़क के खतरनाक हिस्से को पार करने को मजबूर हैं। इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है।
ग्रामीणों को इलाज, राशन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए देवाल पहुंचने में परेशानी हो रही है। लोगों ने सड़क को जल्द सुरक्षित कर यातायात बहाल करने की मांग की है।
ऋषिकेश में उफनी गंगा, पिथौरागढ़ में काली नदी का जलस्तर बढ़ा
प्रदेश में पिछले करीब 36 घंटे से जारी बारिश के बाद नदियां उफान पर हैं। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाट जलमग्न हो गए। परमार्थ निकेतन परिसर में भगवान शिव की प्रतिमा के चरणों तक गंगा का पानी पहुंच गया।
पिथौरागढ़ में काली नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन संवेदनशील इलाकों में मुनादी कर लोगों को सतर्क कर रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की गई है।
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में टोंस नदी के तेज बहाव के बीच कुछ बच्चों के नदी में उतरने का वीडियो भी सामने आया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और बरसाती गदेरों से दूर रहने की अपील की है।
मानसून ने फिर खड़े किए सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल
उत्तराखंड में बारिश हर साल आपदा का खतरा लेकर आती है, लेकिन इस बार भी कई इलाकों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है।
एक ओर राज्य में बड़े सड़क और विकास प्रोजेक्टों की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर कई गांवों में मरीजों को डोली में और ग्रामीणों को खतरनाक रास्तों से होकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है। बरसात के दौरान भूस्खलन और नदी-नालों के उफान से यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन के सामने संवेदनशील मार्गों की निगरानी, बंद सड़कों को खोलने और दुर्गम गांवों में वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।


