बिग ब्रेकिंग: राज्य सहकारी बैंक के 7 करोड़ के लोन घोटाले में FIR, पूर्व एमडी समेत 6 पर मुकदमा

राज्य सहकारी बैंक के 7 करोड़ के लोन घोटाले में FIR, पूर्व एमडी समेत 6 पर मुकदमा

  • 2 करोड़ की मंजूरी के बावजूद 7 करोड़ का ऋण स्वीकृत करने का आरोप, दस्तावेजों में हेराफेरी और नियमों की अनदेखी की जांच शुरू

अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक की अल्मोड़ा शाखा में वर्ष 2017 में स्वीकृत एक बड़े ऋण प्रकरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद पुलिस ने तत्कालीन प्रबंध निदेशक समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आरोप है कि बैंक की प्रबंध समिति से केवल दो करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बावजूद नियमों को दरकिनार कर सात करोड़ रुपये की ऋण सीमा स्वीकृत कर दी गई।

वर्तमान शाखा प्रबंधक समीर भटनागर की तहरीर के अनुसार, 3 मई 2017 को बैंक की प्रबंध समिति ने मैसर्स मां नंदा बिल्डकाम प्राइवेट लिमिटेड की दो करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट ऋण सीमा के नवीनीकरण को मंजूरी दी थी।

लेकिन 25 मई 2017 को बैंक मुख्यालय से सात करोड़ रुपये की ऋण सीमा स्वीकृत करते हुए स्वीकृति पत्र जारी कर दिया गया।

जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं

बैंक के अनुसार विभागीय जांच में पता चला कि ऋण सुरक्षा के लिए बैंक के निर्धारित मानकों से कम मूल्य की संपत्ति को इक्विटेबल मॉर्गेज के रूप में स्वीकार किया गया। इसके अलावा कोलेटरल सिक्योरिटी और अन्य ऋण संबंधी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की गई।

बैंक का आरोप है कि प्रबंध समिति के निर्णय के विपरीत जाकर ऋण सीमा बढ़ाने से बैंक के धन को अनावश्यक वित्तीय जोखिम में डाला गया और नियमों की अनदेखी की गई।

इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय के अनुसार तहरीर के आधार पर निम्नलिखित लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

  • तत्कालीन प्रबंध निदेशक दीपक कुमार
  • तत्कालीन महाप्रबंधक धर्मवीर सिंह
  • तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक कर्ण सिंह बिष्ट
  • तत्कालीन शाखा प्रबंधक मनोज राणा
  • मैसर्स मां नंदा बिल्डकाम प्राइवेट लिमिटेड के
  • निदेशक आनंद सिंह चौहान
  • सुनीता चौहान

दस्तावेजों की हो रही जांच

पुलिस अब ऋण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज, बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट, विधिक राय और अन्य अभिलेखों की जांच कर रही है। बैंक प्रबंधन का आरोप है कि पूरे प्रकरण में धोखाधड़ी, कूटरचना और दस्तावेजों में हेराफेरी कर सार्वजनिक धन को जोखिम में डाला गया। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।