विशेष रिपोर्ट: मानसून का महाअटैक। 158 सड़कें बंद, नंदा की चौकी पर ट्रैफिक बहाल, मसूरी में उठे सवाल और….

मानसून का महाअटैक। 158 सड़कें बंद, नंदा की चौकी पर ट्रैफिक बहाल, मसूरी में उठे सवाल और….

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर विकराल रूप धारण कर चुका है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 29 और 30 जुलाई के लिए प्रदेश के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए भारी से बहुत भारी बारिश, आकाशीय बिजली, तेज गर्जना और तीव्र वर्षा की चेतावनी दी है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद शासन, जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

प्रदेश में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए **बागेश्वर, टिहरी गढ़वाल और चम्पावत** जिलों में 29 जुलाई को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा

मौसम विभाग के अनुसार 29 जुलाई को देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल, चम्पावत और ऊधम सिंह नगर में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कई जिलों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज वर्षा के दौर पड़ने की संभावना है।

30 जुलाई को बागेश्वर, चम्पावत और पिथौरागढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, टिहरी और नैनीताल में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने और आपातकालीन व्यवस्थाएं सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं।

158 सड़कें बंद, सबसे ज्यादा असर देहरादून में

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 158 सड़कें बंद हैं। इनमें 6 राष्ट्रीय राजमार्ग, 19 राज्य राजमार्ग, 3 प्रमुख जिला मार्ग, 2 अन्य जिला मार्ग, 35 लोक निर्माण विभाग की सड़कें और 92 पीएमजीएसवाई एवं ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। सबसे अधिक प्रभावित देहरादून जिला है, जहां अकेले 35 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं।

लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, पहाड़ियों से बोल्डर गिरने, सड़क धंसने और नदी-नालों के उफान पर आने से कई क्षेत्रों का संपर्क बाधित हो गया है। लोक निर्माण विभाग, बीआरओ और जिला प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर मलबा हटाने और सड़कें खोलने के कार्य में जुटी हुई हैं।

चारधाम यात्रा पर मौसम की मार

भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए गढ़वाल मंडल प्रशासन ने 28 और 29 जुलाई के लिए चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम सामान्य होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा।

यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर पालीगढ़ के पास मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है, जबकि जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली में भी कई संपर्क मार्ग बाधित हैं, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

देहरादून में जलभराव, टोंस नदी में युवक बहा

राजधानी देहरादून में सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई भारी बारिश के कारण नेहरू ग्राम, रायपुर, प्रेमनगर, डालनवाला, गणेश एन्क्लेव, नीलकंठ एन्क्लेव, इंदुपुरी फार्म और कई अन्य क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई घरों और सड़कों में पानी भरने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इसी दौरान टोंस नदी में एक युवक के बह जाने की सूचना मिलने पर एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।

पिथौरागढ़ में राहत और नई चुनौती

धारचूला तहसील की सोबला-उमचिया सड़क पर नेकल नाले में बह गए अस्थायी मार्ग के स्थान पर पीएमजीएसवाई ने दो अस्थायी लकड़ी के पैदल पुल तैयार कर दिए हैं।

इससे करीब 90 परिवारों का पैदल संपर्क बहाल हो गया है, हालांकि वाहनों की आवाजाही अभी भी बंद है। विभाग का कहना है कि जलस्तर कम होते ही अस्थायी डायवर्जन बनाकर मोटर मार्ग को दोबारा चालू किया जाएगा।

दूसरी ओर मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र में चीन सीमा के निकट स्थित ल्वां गांव को जोड़ने वाली लकड़ी की पैदल पुलिया तेज बहाव में बह गई है, जिससे गांव और नंदा देवी बेस कैंप का संपर्क टूट गया है।

नंदा की चौकी पुल प्रकरण में तीन दिन में जांच रिपोर्ट

देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाया है। लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने मुख्य अभियंता को तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

रिपोर्ट में तकनीकी कारणों, निर्माण गुणवत्ता, डिजाइन, निगरानी और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारी, अभियंता अथवा निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि विभाग ने मरम्मत कार्य पूरा करने के बाद पुल पर यातायात दोबारा शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में बताया गया है कि भारी बारिश के दौरान टौंस नदी के तेज कटाव से एप्रोच के नीचे की मिट्टी बह गई थी, जिससे सड़क धंस गई।

देहरादून-मसूरी मार्ग की गुणवत्ता पर उठे सवाल

पिछले वर्ष आपदा के बाद लगभग ₹1.95 करोड़ की लागत से पुनर्निर्मित किए गए देहरादून-मसूरी मार्ग पर पहली ही बारिश के बाद कई स्थानों पर सड़क धंसने, रिटेनिंग वॉल टूटने और पुश्ते क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी तथा जल निकासी व्यवस्था की खामियों का आरोप लगाया है।

वहीं लोक निर्माण विभाग ने सभी नए निर्माण कार्यों की तकनीकी समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा है कि यदि किसी निर्माण में गुणवत्ता संबंधी कमी पाई गई तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार में गंगा चेतावनी स्तर पर

लगातार बारिश के कारण हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। भीमगोड़ा बैराज पर जलस्तर 293 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 294 मीटर है। ऊपरी बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य विभागों की टीमें तैनात कर दी गई हैं। गंगा किनारे बसे लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा नदी के पास नहीं जाने की अपील की गई है।

इस बीच हरिद्वार के भगत सिंह चौक, कनखल और ज्वालापुर क्षेत्रों में जलभराव की समस्या एक बार फिर सामने आई। नगर निगम ने पंप लगाकर पानी निकासी का कार्य शुरू कराया। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

मानसून में अब तक 28 लोगों की मौत

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से अब तक प्राकृतिक आपदाओं में **28 लोगों की मौत** हो चुकी है, जबकि **30 लोग घायल** हुए हैं।

इसके अलावा **26 बड़े और 768 छोटे पशुओं** की मौत दर्ज की गई है। इस दौरान **246 मकान आंशिक रूप से, 12 मकान गंभीर रूप से और 4 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त** हुए हैं। एक गौशाला को भी नुकसान पहुंचा है।

लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों से दूर रहने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने और केवल मौसम विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।