मानसून अलर्ट: उत्तराखंड में आपदा से बचाव के लिए डाउनलोड करें ये 6 जरूरी ऐप

मानसून अलर्ट: उत्तराखंड में आपदा से बचाव के लिए डाउनलोड करें ये 6 जरूरी ऐप

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। हर साल भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाएं प्रदेश में जनजीवन को प्रभावित करती हैं।

ऐसे में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। समय पर चेतावनी और सही जानकारी कई जिंदगियों को बचा सकती है।

देहरादून स्थित उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) और USDMA के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और पूर्व चेतावनी प्रणाली को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में सबसे पहला प्रतिक्रियादाता आम नागरिक ही होता है। इसलिए लोगों को प्रशिक्षित और जागरूक बनाना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ स्थानीय लोगों के पारंपरिक ज्ञान का भी उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों में रहने वाले लोग मौसम और प्राकृतिक संकेतों को बेहतर ढंग से समझते हैं।

कार्यक्रम में ग्राम स्तर पर आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार ग्राम प्रधान, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, स्वयं सहायता समूह और पूर्व सैनिक आपदा प्रबंधन की मजबूत कड़ी बन सकते हैं।

उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं, जिनका अनुभव आपातकालीन परिस्थितियों में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच एक गंभीर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि नदी-नालों, झरनों, गहरी खाइयों और अन्य संवेदनशील स्थलों पर रील और सेल्फी बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति कई बार जानलेवा साबित हो रही है।

इसी को देखते हुए जिलों को खतरनाक स्थलों को “नो सेल्फी जोन” घोषित करने और सुरक्षित स्थानों को “सेल्फी सेफ जोन” के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्यक्रम में अर्ली वार्निंग सिस्टम यानी पूर्व चेतावनी तंत्र की उपयोगिता पर भी विशेष चर्चा हुई। एनआईडीएम के प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ी हैं।

ऐसे में समय पर जारी चेतावनी जनहानि और आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है। उन्होंने सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग और आधुनिक मॉनिटरिंग तकनीकों की जानकारी भी साझा की।

आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे मोबाइल फोन में आपदा संबंधी विश्वसनीय ऐप और प्लेटफॉर्म डाउनलोड करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें। अफवाहों और अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट से बचने की सलाह दी गई है।

मानसून में उपयोगी 6 जरूरी ऐप और प्लेटफॉर्म

  • सचेत (Sachet App) – बहु-आपदा चेतावनी प्रणाली
  • दामिनी (Damini App) – बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी
  • आईएमडी मौसम चेतावनी पोर्टल
  • आईएमडी जियोस्पेशियल सर्विसेज
  • वेदास (VEDAS) प्लेटफॉर्म
  • भारतीय सुनामी अर्ली वार्निंग सिस्टम

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, प्रशिक्षण और जनभागीदारी का प्रभावी समन्वय ही आपदा से होने वाले नुकसान को कम कर सकता है।

मानसून के दौरान मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लेना तथा जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।