जनहित याचिका लाई रंग, किच्छा के पंडरी गांव में कब्जा मुक्त हुआ सार्वजनिक मार्ग
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उधम सिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र स्थित पंडरी (राघव नगर) गांव में आम रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर मार्ग को आम जनता के लिए खोल दिया गया है।
इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आश्वासन और कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर याचिका का निस्तारण कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जनहित याचिका दायर होने के बाद संबंधित विभाग को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद एक संयुक्त टीम का गठन कर मौके का निरीक्षण कराया गया।
सरकार ने न्यायालय को अवगत कराया कि टीम द्वारा आम रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाया गया और सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करा लिया गया है।
साथ ही ग्रामीणों के आवागमन के लिए रास्ता भी पूरी तरह खोल दिया गया है। सरकार के इस बयान और कार्रवाई से संतुष्ट होकर न्यायालय ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
याचिकाकर्ता राम प्रकाश यादव ने जनहित याचिका में कहा था कि राजस्व ग्राम पंडरी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर बसाया गया गांव है, जहां सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को कृषि भूमि और आवासीय भूखंड आवंटित किए गए थे।
गांव के राजस्व अभिलेखों में एक सार्वजनिक मार्ग दर्ज है, जिस पर वर्ष 1950 में पुल का निर्माण भी कराया गया था।
याचिका के अनुसार समय के साथ पुल क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि उसके पिलर आज भी मौजूद हैं। पुल के टूटने के बाद कुछ प्रभावशाली लोगों ने सार्वजनिक मार्ग पर कब्जा कर पक्का निर्माण कर दिया, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया।
स्थिति यह थी कि लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की।
हाईकोर्ट की निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब ग्रामीणों को राहत मिली है तथा वर्षों से बंद पड़ा रास्ता फिर से आम जनता के लिए खोल दिया गया है।

