बड़ी खबर: 45 करोड़ की ठगी मामले में दुबई में गिरफ्तार बिल्डर की पत्नी, इंटरपोल की कार्रवाई से खुला बड़ा राज

45 करोड़ की ठगी मामले में दुबई में गिरफ्तार बिल्डर की पत्नी, इंटरपोल की कार्रवाई से खुला बड़ा राज

देहरादून। फ्लैट खरीदारों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर वर्ष 2020 में फरार हुए बिल्डर दंपती के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है।

भगोड़े बिल्डर दीपक मित्तल की पत्नी राखी मित्तल को दुबई में इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया है। फिलहाल उसे दुबई पुलिस की हिरासत में रखा गया है और इसकी आधिकारिक सूचना देहरादून पुलिस को मिल चुकी है।

अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेसन के अनुसार, राखी मित्तल को भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वहीं, मुख्य आरोपी दीपक मित्तल अभी भी फरार है। पुलिस को उम्मीद है कि पत्नी की गिरफ्तारी के बाद उस पर दबाव बढ़ेगा और वह जल्द गिरफ्त में आ सकता है या आत्मसमर्पण कर सकता है।

बताया जा रहा है कि दीपक मित्तल और राखी मित्तल ‘पुष्पांजलि इंफ्राटेक’ कंपनी के निदेशक थे। उन्होंने अपने पार्टनर राजपाल वालिया के साथ मिलकर सहस्रधारा रोड स्थित ‘ऑर्किड पार्क’ नाम से ग्रुप हाउसिंग परियोजना शुरू की थी।

आरोप है कि वर्ष 2020 में दंपती अपने बेटे और बेटी के साथ करीब 90 फ्लैट खरीदारों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लेकर फरार हो गया। इस मामले में अब तक नौ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।

पुलिस लंबे समय से दोनों की तलाश कर रही थी। पहले इनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जिसे बाद में रेड कॉर्नर नोटिस में बदल दिया गया। इसके बाद इंटरपोल की मदद से कार्रवाई तेज हुई और आखिरकार राखी मित्तल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया।

इस पूरे प्रकरण में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच कर रहे हैं। एसटीएफ ने पहले ही दीपक मित्तल के पिता अश्वनी मित्तल को गिरफ्तार किया था, जबकि ईडी ने ऑर्किड पार्क परियोजना और कुछ फ्लैट अटैच किए हैं। साथ ही, पंजाब नेशनल बैंक से लिया गया करीब 21 करोड़ रुपये का ऋण भी एनपीए हो चुका है।

ईडी रिमांड में खुल सकते हैं बड़े राज

राखी मित्तल की गिरफ्तारी के बाद अब इस घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारत लाए जाने के बाद देहरादून पुलिस के साथ-साथ ईडी भी उसे रिमांड पर ले सकती है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच में कई नए खुलासे हो सकते हैं।

जांच में सामने आया है कि फरार होने से पहले कंपनी के खाते से करीब 7.46 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए थे।

यह रकम तीन करीबी लोगों के खातों में भेजी गई, जिन्होंने उसी परियोजना में कई फ्लैट बुक किए। इस मामले में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण उनकी भूमिका पर सवाल बने हुए हैं।

150 करोड़ की जमीन फंसी, पार्टनर पर भी संकट

इस मामले में कंपनी के पार्टनर राजपाल वालिया को भी जेल जाना पड़ा था। परियोजना उनकी जमीन पर बन रही थी, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। ईडी के अटैचमेंट और एनसीएलटी प्रक्रिया के चलते यह संपत्ति फिलहाल विवादों में फंसी हुई है।

2018 से बंद निर्माण, खरीदार परेशान

ऑर्किड पार्क परियोजना के तहत 8 टावरों में 331 फ्लैट बनाने की योजना थी, लेकिन केवल दो टावरों के अधूरे ढांचे ही तैयार हो सके। वर्ष 2018 से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। बिल्डर द्वारा 90 खरीदारों से रकम लेने के बावजूद न तो निर्माण पूरा किया गया और न ही पैसा लौटाया गया।

इसके बाद खरीदारों ने पुलिस और रेरा में शिकायत दर्ज कराई। इस परियोजना से जुड़े कुल 62 मामले रेरा में दर्ज हैं। वर्तमान में अधूरे टावर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और पीड़ित खरीदार न्याय की आस लगाए हुए हैं।