बड़ी खबर: धामी सरकार का संगठन-शासन संतुलन पर फोकस, दायित्वधारियों की दूसरी सूची जारी

धामी सरकार का संगठन-शासन संतुलन पर फोकस, दायित्वधारियों की दूसरी सूची जारी

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने कैबिनेट विस्तार के बाद संगठन और शासन के बीच तालमेल मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।

इसी क्रम में सरकार ने दायित्वधारियों की दूसरी सूची जारी करते हुए सात और नेताओं को विभिन्न आयोगों, परिषदों और समितियों में जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

इससे पहले शुक्रवार को 14 नेताओं को दायित्व दिए गए थे। अब कुल 21 नियुक्तियों के साथ सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठनात्मक संतुलन और प्रशासनिक मजबूती उसकी प्राथमिकता में है।

दूसरी सूची में इन नेताओं को जिम्मेदारी

रविवार को जारी सूची में सात नेताओं को सदस्य के रूप में नामित किया गया है।

  • राव खाले खां – किसान आयोग
  • योगेश रजवार – बाल संरक्षक आयोग
  • दीप प्रकाश नेवलिया – समाज कल्याण अनुश्रवण समिति
  • मनोज गौतम – अनुसूचित जाति आयोग
  • प्रेमलता – महिला आयोग
  • रूचि गिरी – अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग
  • राजपाल कश्यप – अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद

पहले चरण में 14 नियुक्तियां

पहले चरण में भी सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के नेताओं को प्रमुख पदों पर तैनात किया था।

  • कुलदीप सुटोला – राज्य स्तरीय खेल परिषद (अध्यक्ष)
  • ध्रुव रौतेला – मीडिया सलाहकार समिति (उपाध्यक्ष)
  • हरिप्रिया जोशी – राज्य महिला आयोग
  • विनोद सुयाल – राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद
  • मुकेश महराना – चाय विकास सलाहकार परिषद
  • चारु कोठारी – राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद
  • प्रेम सिंह राणा – जनजाति आयोग
  • खेम सिंह चौहान – ओबीसी कल्याण परिषद
  • सोना सजवाण – जड़ी-बूटी सलाहकार समिति
  • गोविंद पिलखवाल – हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद
  • बलजीत सोनी – अल्पसंख्यक आयोग
  • सीमा चौहान – मत्स्य विकास प्राधिकरण (उपाध्यक्ष)
  • भावना मेहरा और अशोक वर्मा को भी दायित्व सौंपे गए

राजनीतिक संतुलन का स्पष्ट संदेश

सरकार के इस कदम को क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। विभिन्न जिलों और वर्गों के नेताओं को शामिल कर धामी सरकार ने संगठन को साधने के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत करने का संकेत दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये नियुक्तियां आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक ऊर्जा बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।