कन्फर्म सीट पर अवैध कब्जा। उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को ठहराया दोषी, ₹75 हजार मुआवजा आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पालक्काड ने कन्फर्म टिकट होने के बावजूद यात्रियों को सीट न मिलने के मामले में भारतीय रेलवे को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।
मामला 10 दिसंबर 2023 का है, जब दो वरिष्ठ नागरिक और उनके पुत्र ने कन्याकुमारी–पुणे एक्सप्रेस में ओट्टापालम/पालक्काड से तिरुपति तक स्लीपर क्लास के कन्फर्म टिकट बुक किए थे।
ट्रेन में चढ़ने पर उनकी सीटों पर बिना टिकट और बिना आरक्षण वाले यात्रियों का कब्जा मिला, जिससे उन्हें पूरी यात्रा में भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
शिकायतकर्ताओं ने टीटीई और आरपीएफ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने Rail Madad ऐप पर भी शिकायत दर्ज की,
फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। कोच में इतनी भीड़ थी कि यात्रियों को फर्श और बर्थ के नीचे तक बैठना पड़ा और वॉशरूम तक जाना मुश्किल हो गया।
आयोग ने पाया कि रेलवे अपने दावों के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। वहीं, यात्रियों द्वारा दिए गए टिकट, स्क्रीनशॉट और फोटो से स्पष्ट हुआ कि कन्फर्म सीट होने के बावजूद उन्हें आरामदायक यात्रा नहीं मिल पाई।
आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए रेलवे को ₹50,000 मुआवजा और ₹25,000 मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि 45 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए, अन्यथा देरी पर ₹500 प्रति माह अतिरिक्त देना होगा।

