विशेष रिपोर्ट: उत्तराखंड में आग का कहर। सेब के बगीचे, होटल-दुकानें और जंगल जलते रहे, प्रशासन अलर्ट

उत्तराखंड में आग का कहर। सेब के बगीचे, होटल-दुकानें और जंगल जलते रहे, प्रशासन अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में आग की घटनाओं ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। कहीं सेब के बगीचे जलकर खाक हो गए तो कहीं होटल और दुकानें राख में तब्दील हो गईं, वहीं पहाड़ी जंगलों में लगी आग से पर्यावरण और वन्यजीवों पर संकट मंडरा रहा है।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों और जलवायु असंतुलन की चुनौती को उजागर कर दिया है।

विकासनगर-जौनसार: सेब के बगीचे में आग, 300 पेड़ों को भारी नुकसान

देहरादून जिले के विकासनगर-जौनसार क्षेत्र के अस्टाड़ गांव में चकराता-मंगरौली मोटर मार्ग के किनारे सूखी घास में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया। तेज हवा के कारण आग पास ही स्थित बागवान ब्रह्म दत्त जोशी के सेब के बगीचे तक पहुंच गई।

आग की चपेट में आकर करीब 300 सेब के पेड़ पूरी तरह या आंशिक रूप से जल गए। पीड़ित बागवान ने बताया कि वर्षों की मेहनत से तैयार बगीचे से इस साल अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन आग ने सब कुछ नष्ट कर दिया। तहसील प्रशासन को सूचना दे दी गई है और मुआवजे की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से बारिश न होने के कारण घास पूरी तरह सूख चुकी है, जिससे मामूली चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले रही है।

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ हाईवे के पास जनरल स्टोर और होटल में भीषण आग

रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ हाईवे से सटे गबनीगांव में रविवार देर रात एक जनरल स्टोर और होटल में भीषण आग लग गई। रात करीब 1:30 बजे सूचना मिलने पर फायर सर्विस रुद्रप्रयाग और थाना अगस्त्यमुनि की टीमें मौके पर पहुंचीं।

आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दुकान और होटल पूरी तरह जलकर राख हो गए, वहीं बाहर खड़े दो वाहन भी जल गए। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

अग्निशमन विभाग, पुलिस, ग्रामीणों और रिन्यू जल ऊर्जा कुंड के कर्मचारियों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है, जबकि आर्थिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

केदारघाटी के जंगलों में भीषण वनाग्नि, वन्यजीवों पर संकट

रुद्रप्रयाग जिले की केदारघाटी के सीमांत और ऊंचाई वाले इलाकों में जंगलों में भीषण आग लगी हुई है। आग से लाखों रुपये की वन संपदा जलकर नष्ट हो चुकी है और वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद मई-जून जैसी स्थिति बनी हुई है। चट्टानी और दुर्गम इलाकों के कारण आग बुझाने में वन विभाग को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन के अनुसार, आग पर काबू पाने के लिए टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।

राहत की खबर: फूलों की घाटी पूरी तरह सुरक्षित

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क क्षेत्र में आग की घटनाओं के बीच फूलों की घाटी को लेकर फैली आशंकाओं पर विराम लग गया है। वन विभाग द्वारा कराए गए हवाई सर्वेक्षण में पुष्टि हुई है कि यूनेस्को विश्व धरोहर फूलों की घाटी के कोर एरिया या आसपास के संवेदनशील हिस्सों में आग की कोई घटना नहीं हुई है।

फॉरेस्ट फायर सीसीएफ सुशांत पटनायक ने बताया कि नंदा देवी पार्क के कुछ स्थानों पर हल्की आग जरूर लगी थी, लेकिन उसे समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। फिलहाल क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है।

बढ़ती घटनाओं ने खड़े किए सवाल

उत्तराखंड में एक के बाद एक सामने आ रही आग की घटनाएं बागवानी, पर्यटन, वन संपदा और ग्रामीण आजीविका के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।

मौसम की अनियमितता, बारिश की कमी और मानवजनित लापरवाही इन घटनाओं की प्रमुख वजह मानी जा रही है। ऐसे में आग की रोकथाम, त्वरित राहत और प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग और तेज हो गई है।