उत्तराखंड: लॉकडाउन के बीच शुभ मुहूर्त में खुले गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट। पीएम मोदी के नाम से हुई पहली पूजा

लॉकडाउन के बीच शुभ मुहूर्त में खुले गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट

 

– पीएम मोदी के नाम से हुई पहली पूजा

रिपोर्ट- चंदन सिंह बिष्ट
हल्द्वानी। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही आज विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का भी आगाज हो गया है। शुभ मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर गंगोत्री धाम और 12 बजकर 41 मिनट पर यमुनोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। इस अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अक्षय तृतीया महापर्व की शुभ बेला पर मंदिर समिति गंगोत्री को 1100 रुपये दान स्वरूप दिए। वहीं, धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री मोदी के नाम से हुई।

इस दौरान मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल, सह सचिव राजेश सेमवाल, अध्यक्ष गंगा पुरोहित सभा पवन सेमवाल, सदस्य मंदिर समिति, राकेश सेमवाल, सचिव मंदिर समिति, दीपक सेमवाल, एसडीएम देवेंद्र नेगी, पुलिस उपाधीक्षक कमल सिंह पंवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डीपी जोशी भी मौजूद रहे। इससे पहले आज सुबह मां यमुना की डोली खरसाली से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई थी। इस दौरान उन्हें विदा करने के लिए भाई शनिदेव की डोली भी निकली। परंपरा के अनुसार मुखबा गांव से मां गंगा की भोग मूर्ति को डोली यात्रा को शनिवार को ही गंगोत्री धाम के लिए रवाना कर दिया गया था। भैरोंघाटी स्थित प्राचीन भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद डोली यात्रा आज दोपहर तक गंगोत्री धाम पहुंची।

पूजा में 21-21 तीर्थ पुरोहित ही हुए शामिल

कोरोना संक्रमण की आशंका के मद्देनजर लॉकडाउन की पाबंदियों के चलते इस बार केवल 21-21 तीर्थ पुरोहित कपाटोद्घाटन में शामिल हो सके। डोली यात्रा के लिए भी यही प्रावधान किया गया था। डोली यात्रा के दौरान शारीरिक दूरी के नियम का भी पालन किया गया। डीएम डॉ आशीष चौहान और पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट ने बताया कि, चार धाम यात्रा अभी प्रतिबंधित है। रविवार को भी जब डोली निकाली गई तो दो लोग ही डोली लेकर चले। उनके साथ दो से तीन और लोग सोशल डिस्टेंस बनाकर धाम के लिए रवाना हुए थे।

श्रद्धालुओं को नहीं धाम में जाने की अनुमति

लॉकडाउन की पाबंदियों के चलते फिलहाल किसी भी श्रद्धालु को धाम में आने की अनुमति नहीं है। परंपराओं के निर्वहन के लिए सीमित संख्या में तीर्थ पुरोहितों को छोड़ कर अन्य किसी को भी धामों में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। मंदिर समिति के सचिव कृत्तेश्वर उनियाल के अनुसार मंदिर में चुनिंदा पुजारी ही नियमित रूप से पूजा-अर्चना करेंगे। बताया कि, धाम में बिजली, पानी, शौचालय आदि बुनियादी व्यवस्थाएं करीब करीब पूरी हैं। जानकीचट्टी से धाम तक पांच किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग का निर्माण कार्य भी पूरा होने वाला है।