गलत आंकड़ों पर हाईकोर्ट सख्त! शहरी विकास निदेशक तलब
- भावन पोर्टल के आंकड़ों और कारण बताओ नोटिस में मिला विरोधाभास, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शहरी विकास विभाग से जुड़े एक मामले में कारण बताओ नोटिस में दर्ज आंकड़ों और भावन पोर्टल पर अपलोड डेटा के बीच विरोधाभास मिलने पर कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने प्रथम दृष्टया आंकड़ों में अंतर पाए जाने पर शहरी विकास निदेशालय के निदेशक को 28 अक्टूबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी से स्पष्ट करने को कहा है कि नोटिस में गलत आंकड़े किस आधार पर दर्ज किए गए।
मामला विस्तार गुप्ता बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने संबंधित आदेश और कारण बताओ नोटिस का अवलोकन किया।
इस दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि नोटिस में उल्लिखित आंकड़े भावन पोर्टल पर अपलोड किए गए डेटा से मेल नहीं खाते। आंकड़ों में इस अंतर को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने संबंधित विभाग से जवाब मांगने का निर्णय लिया।
नोटिस के आंकड़ों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट के 15 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, कारण बताओ नोटिस और पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के बीच विरोधाभास सामने आने के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लेना जरूरी समझा।
अदालत ने निर्देश दिया कि शहरी विकास निदेशालय के निदेशक 28 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल होकर बताएं कि नोटिस में दर्ज आंकड़ों का आधार क्या था और पोर्टल पर उपलब्ध डेटा से उनका मिलान क्यों नहीं हुआ।
28 अक्टूबर को निदेशक को देना होगा जवाब
इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी, राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता केएन जोशी और प्रतिवादी संख्या पांच की ओर से अधिवक्ता ललित मिगलानी ने पक्ष रखा।
अब 28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में शहरी विकास निदेशालय के निदेशक के स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी।
अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि कारण बताओ नोटिस में दर्ज आंकड़े किस आधार पर तैयार किए गए और पोर्टल पर उपलब्ध डेटा से उनमें अंतर क्यों है। इस मामले में हाईकोर्ट का रुख सरकारी रिकॉर्ड और नोटिस में दर्ज तथ्यों की सटीकता को लेकर अहम माना जा रहा है।




