50 हजार लोगों की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर, सुनवाई टलने से बढ़ी बेचैनी
हल्द्वानी। बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को प्रस्तावित सुनवाई टल गई, जिससे करीब 50 हजार लोगों के भविष्य पर फैसला फिलहाल अधर में लटक गया है।
सुनवाई स्थगित होने से प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले के अंतिम निपटारे के लिए अब और इंतजार करना पड़ेगा। संभावना जताई जा रही है कि मामला अब 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध हो सकता है।
सुनवाई से पहले किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए नैनीताल पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में रही। बनभूलपुरा क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था।
एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र के नेतृत्व में अधिकारियों और जवानों को विशेष निर्देश दिए गए थे। क्षेत्र में ड्रोन से निगरानी की गई और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी गई। पुलिस ने छतों पर पत्थर, ईंट या मलबा जमा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
वहीं, एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी खुद पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे। पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे, ताकि किसी भी अफवाह या अप्रिय स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
गौरतलब है कि रेलवे भूमि अतिक्रमण विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पुनर्वास प्रक्रिया को भी गति दी गई है। प्रशासन करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर 4300 से अधिक प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बसाने की तैयारी कर रहा है।
जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पात्र परिवारों के लिए विशेष कैंप आयोजित करने की योजना भी बनाई गई है।
इस बीच हल्द्वानी में आयोजित भाजपा प्रदेश विस्तारित कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनभूलपुरा अतिक्रमण के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों ने अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए अतिक्रमण को बढ़ावा दिया।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टलने के बाद अब हजारों प्रभावित परिवारों की निगाहें अगली संभावित तारीख पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले की दिशा और भविष्य तय हो सकता है।


