उत्तराखंड में 6 दिन आफत की बारिश, 31 अगस्त-1 सितंबर को ऑरेंज अलर्ट। नेपाल में बाढ़ से 724 मौतें
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने की तैयारी में है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 3 सितंबर तक मौसम का पूर्वानुमान जारी करते हुए अगले कई दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी है।
खास तौर पर 31 अगस्त और 1 सितंबर को कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं अन्य दिनों में भी कई जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी है। लगातार बारिश के बीच पहले से ही बंद सड़कों, बढ़ते नदी-नालों और भूस्खलन की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विभाग के मुताबिक 29 अगस्त को उत्तराखंड के सभी जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
इसके अलावा अन्य जिलों में भी बारिश के तेज से बहुत तेज दौर चलने की संभावना जताई गई है। 30 अगस्त को भी प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में बारिश का सिलसिला बना रहेगा। इस दिन रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान है।
सबसे ज्यादा चिंता 31 अगस्त को लेकर है। मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ तीव्र से अत्यंत तीव्र बारिश के दौर आने की संभावना है।
टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भी भारी बारिश और वज्रपात का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अगले दिन यानी 1 सितंबर को भी मौसम राहत देने के मूड में नहीं है। देहरादून और टिहरी में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
2 और 3 सितंबर को भी राज्य के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। यानी आने वाले दिनों में उत्तराखंड के लोगों को बारिश से तत्काल राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं।
मौसम विभाग ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर भूस्खलन और चट्टान खिसकने की आशंका भी जताई है। इसके कारण पहाड़ी सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बाधित हो सकता है।
इसके साथ ही आकाशीय बिजली और अचानक तेज बारिश के खतरे को देखते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
इस बीच राज्य में बारिश से पैदा हुई परिस्थितियों ने पहले ही मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की 29 अगस्त की सुबह की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं में 45 लोगों की मौत, 46 लोग घायल और 55 लोग लापता बताए गए हैं।
प्रदेश में अभी भी 54 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इनमें तीन स्टेट हाईवे, एक बीआरओ मार्ग, 12 लोक निर्माण विभाग की सड़कें और 38 पीएमजीएसवाई अथवा ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।
सड़क बंद होने के मामले में चमोली सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 16 सड़कें अवरुद्ध हैं। पिथौरागढ़ में नौ, रुद्रप्रयाग में आठ और बागेश्वर में सात सड़कें बंद हैं। देहरादून में पांच, टिहरी में तीन और उत्तरकाशी में दो सड़कें यातायात के लिए बाधित हैं।
प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से मार्ग खोलने का काम जारी है। चमोली में जोशीमठ-मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग को फिलहाल 10 टन तक के वाहनों के लिए अस्थायी रूप से खोला गया है।
नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भी चिंता बढ़ाई है। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी का जलस्तर चेतावनी और खतरे के स्तर से नीचे है, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
चमोली में अलकनंदा, नंदाकिनी और पिंडर तथा हरिद्वार में गंगा का जलस्तर भी निगरानी में है। पिथौरागढ़ में काली नदी खतरे के स्तर से महज 1.40 मीटर नीचे दर्ज की गई, जिससे आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान जोखिम बढ़ सकता है।
बारिश का असर सड़क हादसों पर भी दिखाई दे रहा है। टिहरी के नरेंद्रनगर क्षेत्र में 28 अगस्त की रात एक निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बस में करीब 55 यात्री सवार थे।
हादसे में दो लोगों की मौत हुई, जबकि कई यात्री घायल हुए। पांच घायलों की हालत गंभीर बताई गई। देहरादून के चकराता क्षेत्र में भी वाहन दुर्घटना में पांच लोग घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर रही।
उधर उत्तरकाशी में यमुनोत्री हाईवे चौड़ीकरण के दौरान हुई रोड कटिंग के बाद कंडारी मोटर मार्ग पर धंसाव ने गोडर पट्टी के 27 गांवों की परेशानी बढ़ा दी है। मार्ग पिछले तीन दिनों से बंद है। सेब सीजन के बीच सड़क बंद होने से काश्तकार अपनी नगदी फसल मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
दूध उत्पादकों की परेशानी भी कम नहीं है। ग्रामीणों को दूध के ड्रम रस्सियों के सहारे खड़ी ढलान से नीचे मुख्य मोटर मार्ग तक पहुंचाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
उत्तराखंड के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पड़ोसी देश नेपाल इस समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है।
नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 724 तक पहुंच गया है, जबकि करीब 2,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी है। नेपाल ने 18 हजार से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों को राहत और बचाव कार्य में लगाया है।
नेपाल के चितवन में सबसे ज्यादा 246 शव बरामद हुए हैं। नवलपरासी ईस्ट में 165, नवलपरासी वेस्ट में 63, गोरखा में 57, नुवाकोट में 51, धाडिंग में 45, तनहुन में 35 और रसुवा में 13 शव मिले हैं।
लापता लोगों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले लोग, विदेशी नागरिक, स्थानीय नागरिक और सुरक्षा व सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। अकेले हाइड्रोपावर परियोजनाओं से 933 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों का भी पता नहीं चल पाया है।
नेपाल में तबाही के बाद भारत ने भी राहत अभियान तेज कर दिया है। भारत ने रविवार को काठमांडू के लिए चौथी राहत उड़ान भेजी, जिसमें 11 टन जरूरी राहत सामग्री के साथ तकनीकी और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भेजी गई।
कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी सामग्री के अलावा मुश्किल सुरंगों में खोज एवं बचाव के लिए प्रशिक्षित टीम और डीएनए जांच में मदद करने वाले विशेषज्ञ भी भेजे गए हैं।
नेपाल की त्रासदी उत्तराखंड के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। हिमालयी क्षेत्र में मौसम का बदलता मिजाज, अचानक अत्यधिक बारिश, ग्लेशियर झीलों का खतरा, भूस्खलन और नदियों के अचानक उफान जैसी घटनाएं अब सीमाओं से परे साझा जोखिम बनती जा रही हैं।
उत्तराखंड में पहले ही कई आपदाओं में जान-माल का नुकसान हो चुका है। ऐसे में अगले दो दिनों के ऑरेंज अलर्ट को महज मौसम की सूचना मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, बंद सड़कों को जल्द खोलने, नदी-नालों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और ग्रामीण क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी पहुंचाने की है। खासकर 31 अगस्त और 1 सितंबर को पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचना बेहद जरूरी होगा।
उत्तराखंड में बारिश अभी थमी नहीं है और नेपाल की तबाही बता रही है कि हिमालय में अचानक बदलता मौसम कितनी बड़ी आफत में बदल सकता है। आने वाले 48 घंटे प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए बेहद सतर्क रहने वाले हैं।


