बंदी की बाईपास सर्जरी में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस बल नहीं देने पर SSP से मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी को गंभीर स्वास्थ्य समस्या के बावजूद उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश भेजने में पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराने को गंभीरता से लिया है।
अदालत ने इसे प्रशासन की गंभीर चूक माना है। कोर्ट ने उधम सिंह नगर के एसएसपी को तत्काल पुलिस बल उपलब्ध कराने और बंदी को 12 अगस्त की सुबह एम्स ऋषिकेश भेजने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मंसाद बनाम राज्य सरकार मामले की सुनवाई की।
अदालत को बताया गया कि अपीलकर्ता मंसाद को 9 अगस्त 2019 को हल्द्वानी के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
खराब स्वास्थ्य के आधार पर उसने दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की है। इससे पहले उसे 23 अगस्त 2023 को अल्प अवधि की जमानत मिली थी।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय कारागार सितारगंज की रिपोर्ट अदालत के सामने रखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बंदी को 24 मई 2026 को एम्स ऋषिकेश भेजा गया था, जहां चिकित्सकों ने उसकी बाईपास सर्जरी की सलाह दी थी।
इसके बाद जेल प्रशासन ने सर्जरी के लिए उसे दोबारा एम्स ले जाने के लिए पुलिस बल की मांग की, लेकिन पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया गया। इस कारण बंदी अब तक एम्स में भर्ती नहीं हो सका।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जेल प्रशासन ने 16 जून से 28 जुलाई 2026 के बीच कई बार पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। 16, 27 और 30 जून तथा 4, 7, 14, 18, 21, 25 और 28 जुलाई को पत्र भेजे गए, लेकिन अलग-अलग कारणों से पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए आदेश की प्रति तत्काल उधम सिंह नगर के एसएसपी को भेजने के निर्देश दिए।
एसएसपी को मंगलवार शाम तक पुलिस बल की व्यवस्था कर केंद्रीय कारागार सितारगंज के अधीक्षक से समन्वय करने को कहा गया, ताकि बंदी को बुधवार सुबह जल्द से जल्द एम्स ऋषिकेश भेजकर चिकित्सकों की सलाह के अनुसार उपचार कराया जा सके।
19 अगस्त को SSP को देना होगा जवाब
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को तय की है। एसएसपी रुद्रपुर को उस दिन रिपोर्ट पेश करनी होगी और यह बताना होगा कि जेल प्रशासन की ओर से बार-बार पुलिस बल की मांग किए जाने के बावजूद आखिर पुलिस बल उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया।
कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है और जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई शुरू की गई है। एसएसपी को 19 अगस्त को सुबह 10:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।


