हाईकोर्ट ने कसी जांच की लगाम। पूर्व सैनिक मौत केस में CBCID, नाबालिग केस में जमानत पर फैसला टला
- एक मामले में निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट ने बदली जांच एजेंसी, दूसरे में राज्य सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब; अगली सुनवाई 20 अगस्त को
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। पिथौरागढ़ के बेरीनाग निवासी पूर्व सैनिक दीपक सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच अब CBCID करेगी।
जबकि भवाली में नाबालिग युवती के यौन शोषण और धमकी के आरोपी व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे को फिलहाल अदालत से राहत नहीं मिली है। दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने निष्पक्ष जांच और पीड़ित पक्ष के अधिकारों को लेकर गंभीरता दिखाई है।
पूर्व सैनिक की मौत की जांच अब CBCID के हवाले
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता हरीश चंद्र मेहरा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हल्द्वानी थाने में दर्ज FIR की जांच तत्काल प्रभाव से CBCID को स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
मामले में पूर्व में नियुक्त जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष जताया गया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और अपर शासकीय अधिवक्ता की ओर से भी जांच CBCID को सौंपने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद अदालत ने निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए यह आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि CBCID की जांच कम से कम क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी। वहीं जांच की व्यक्तिगत निगरानी कुमाऊं क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक करेंगे।
अदालत ने IG कुमाऊं को निर्देश दिए हैं कि वह प्रत्येक 15 दिन में जांच की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट ने मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।
पिता ने हत्या को आत्महत्या का रूप देने का लगाया था आरोप
पूर्व सैनिक दीपक सिंह के पिता हरीश चंद्र मेहरा ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या को आत्महत्या का रूप देने की साजिश की गई। अप्रैल 2025 में हल्द्वानी क्षेत्र में दीपक का शव मिलने के बाद परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कथित विसंगतियों, शरीर पर मिले चोट के निशानों, विसरा रिपोर्ट में देरी और घटनास्थल से जुड़े वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच की मांग की थी।
परिवार की ओर से CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी गहन जांच की मांग की गई थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच CBCID करेगी।
नाबालिग से यौन शोषण के आरोपी को फिलहाल राहत नहीं
दूसरे मामले में हाईकोर्ट ने भवाली में नाबालिग युवती के साथ कथित यौन शोषण और उसे डराने-धमकाने के आरोपी भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे की जमानत याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने फिलहाल आरोपी को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार को मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कथित घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी और उसकी उम्र 17 वर्ष थी।
कोर्ट की मौखिक टिप्पणी ने खींचा ध्यान
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने समाज में प्रभावशाली लोगों द्वारा किए जाने वाले ऐसे कृत्यों को लेकर कड़ी मौखिक टिप्पणी भी की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जो लोग कभी समाज के लिए उदाहरण हुआ करते थे, वे ऐसे कृत्यों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आर्थिक और सामाजिक प्रभाव आने के बाद कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि उनके आपराधिक कृत्यों का उनके परिवार और बच्चों पर भी असर पड़ता है।
पहले शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का केस, बाद में बदली शिकायत
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, कुछ समय पहले पीड़िता ने नरेश पांडे के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में नैनीताल कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, बाद में युवती ने यह मामला वापस ले लिया था।
इसके बाद युवती ने तल्लीताल थाने में तीन अन्य युवकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अपनी नई शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि इन तीन युवकों ने उसका वीडियो वायरल करने की धमकी दी और व्यापार मंडल अध्यक्ष के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया।
फिलहाल हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर कोई राहत नहीं दी है और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत सरकार के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी।
दो मामलों में हाईकोर्ट का सख्त संदेश
इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट के आदेश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर संदिग्ध मौत की जांच को स्थानीय पुलिस से CBCID को सौंपकर अदालत ने निष्पक्ष जांच की निगरानी अपने हाथ में ली है। वहीं दूसरे मामले में नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोपों को देखते हुए आरोपी को तत्काल राहत देने से इनकार किया गया है।


