बिग ब्रेकिंग: देहरादून में हाई-प्रोफाइल ठगी का खुलासा, पूर्व मुख्य सचिव का फर्जी IPS बेटा गिरफ्तार

देहरादून में हाई-प्रोफाइल ठगी का खुलासा, पूर्व मुख्य सचिव का फर्जी IPS बेटा गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे आर. यशोवर्धन (35) को देहरादून पुलिस ने फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

आरोपी खुद को कभी IPS, कभी RAW, CBI, CRPF, NIA और यहां तक कि भारतीय सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था और नौकरी, सरकारी काम, स्टार्टअप फंडिंग तथा सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठता था।

राजपुर थाना पुलिस ने एसएसपी देहरादून के निर्देश पर गठित विशेष टीम की कार्रवाई में आरोपी को मसूरी रोड स्थित CSI तिराहे से गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अलग-अलग फर्जी पहचान बनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहा था।

UPSC में असफलता के बाद अपनाया ठगी का रास्ता
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पिता राज्य के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी रहे हैं।

बचपन से अधिकारियों के रुतबे से प्रभावित होकर उसने भी आईपीएस बनने का सपना देखा और कई वर्षों तक UPSC की तैयारी की। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उसने फर्जी पहचान बनाकर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया।

आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड, वर्दियां और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रतीक चिह्न तैयार कराए। इसके बाद सरकारी संपर्कों का झूठा दावा कर लोगों का भरोसा जीतता और उनसे मोटी रकम ठग लेता था।

दो मामलों में 19.60 लाख रुपये की ठगी का आरोप
पुलिस के अनुसार राजपुर थाने में दर्ज दो मामलों में आरोपी पर कुल 19.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।

  • एक MBBS छात्र से कंपनी रजिस्ट्रेशन और स्टार्टअप फंडिंग दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये लिए।
  • एक महिला वैज्ञानिक से रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4.60 लाख रुपये ठग लिए।

इन शिकायतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

छापेमारी में मिला फर्जी सरकारी तंत्र का पूरा सामान
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी सरकारी सामग्री बरामद की।

इनमें शामिल हैं—

  • 5 फर्जी पहचान पत्र
  • 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड
  • पुलिस एवं सेना के 25 लोगो/बैज
  • सेना एवं पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां
  • 3 फर्जी रैंक रिबन
  • एक वायरलेस सेट
  • एक लैपटॉप

रौबदार अंदाज से करता था लोगों को प्रभावित

एसपी सिटी के अनुसार आरोपी वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड और प्रभावशाली व्यक्तित्व का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतता था। इसके बाद नौकरी, सरकारी परियोजनाएं, टेंडर और अन्य सुविधाएं दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूलता था।

पुराने मामलों की भी होगी जांच

देहरादून पुलिस अब आरोपी के पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच की जा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और क्या इस पूरे फर्जीवाड़े में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।