तीन बड़े फैसलों से साफ हुआ अदालत का रुख। सुरक्षा से समझौता नहीं, नियमों का होगा पालन
नैनीताल। उत्तराखंड की न्यायपालिका से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मामलों में बड़े फैसले सामने आए हैं। एक ओर प्रदेशभर में नई शराब की उप दुकानें नहीं खोले जाने का रास्ता साफ हो गया है।
दूसरी ओर देहरादून की चर्चित पिनैकल रेजीडेंसी को दी गई फायर एनओसी को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करने के मामले में जनमत संग्रह कराने के आदेश को पूरी तरह निरस्त करते हुए राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन को आपसी समन्वय से समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं।
नई शराब की उप दुकानें नहीं खुलेंगी, हटवाल गांव की दुकान पर भी रोक
टिहरी जिले की धनौल्टी तहसील के हटवाल गांव में प्रस्तावित शराब की उप दुकान को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
सुनवाई के दौरान आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया कि नई आबकारी नीति के तहत प्रदेश में नई शराब की उप दुकानें नहीं खोली जाएंगी और केवल वर्ष 2024-25 से संचालित पुरानी दुकानें ही जारी रहेंगी।
याचिकाकर्ता जिला पंचायत सदस्य सीता देवी ने आरोप लगाया था कि स्थानीय विरोध के बावजूद हटवाल गांव में नई दुकान खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
हालांकि बाद में आबकारी आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर नई उप दुकानें नहीं खोलने के आदेश दिए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
पिनैकल रेजीडेंसी की फायर एनओसी रद्द, डीएम का आदेश भी खारिज
देहरादून के जाखन स्थित पिनैकल रेजीडेंसी ग्रुप हाउसिंग परियोजना को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायालय ने जिलाधिकारी देहरादून के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी को बिल्डर के पक्ष में फायर एनओसी जारी करने के निर्देश दिए गए थे।
अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि बिल्डर ने स्वीकृत नक्शे से हटकर ऐसे निर्माण किए हैं, जिनसे आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों का प्रवेश और राहत कार्य प्रभावित हो सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि फायर सेफ्टी अधिकारियों की तकनीकी आपत्तियों को केवल एक वीडियो के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए जिलाधिकारी के पास भेजते हुए सभी पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार नया निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने भी महत्वपूर्ण आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट स्थानांतरण के लिए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की बात कही गई थी।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट किया कि जनमत संग्रह कराना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट और राज्य सरकार आपसी समन्वय के साथ प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे का समाधान निकालें।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हल्द्वानी में हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए चिन्हित भूमि से संबंधित सभी आवश्यक स्वीकृतियां छह सप्ताह के भीतर पूरी की जाएं और उसके बाद भूमि हाईकोर्ट प्रशासन को सौंप दी जाए, ताकि नए परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
इन तीनों फैसलों को उत्तराखंड में न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक फैसला आबकारी नीति को लेकर सरकार के रुख को स्पष्ट करता है।
दूसरा सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और तीसरा प्रदेश के हाईकोर्ट के भविष्य और उसके बुनियादी ढांचे से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद के समाधान की दिशा तय करता है।
