क्राइम अपडेट: दरोगा पर जानलेवा हमला, जाली नोट गैंग गिरफ्तार, रेरा का बिल्डर पर सख्त आदेश

दरोगा पर जानलेवा हमला, जाली नोट गैंग गिरफ्तार, रेरा का बिल्डर पर सख्त आदेश

देहरादून। उत्तराखंड में रविवार को अपराध और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी तीन बड़ी घटनाएं सामने आईं। देहरादून में पालतू कुत्तों को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसमें एक दरोगा और उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए।

वहीं हरिद्वार पुलिस ने 84,500 रुपये की नकली करेंसी के साथ चार लोगों को गिरफ्तार कर जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश किया।

दूसरी ओर उत्तराखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने 16 साल पुराने प्लॉट विवाद में खरीदार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए बिल्डर को 45 दिन के भीतर कब्जा देने और वर्षों की देरी का ब्याज चुकाने का आदेश दिया है।

देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र स्थित आदर्श कॉलोनी में पालतू कुत्तों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।

आरोप है कि पड़ोसी के पिटबुल के हमले के बाद शुरू हुई कहासुनी के दौरान देहरादून कोतवाली में तैनात दरोगा नवीन भारद्वाज और उनके बेटे पर लाठी-डंडों व धारदार हथियार से हमला कर दिया गया।

दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दरोगा के सिर में छह और उनके बेटे के सिर में दो टांके लगाए गए। पुलिस ने धर्मेंद्र भट्ट, अंकित भट्ट, महेंद्र भट्ट, अंजलि भट्ट समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। दूसरे पक्ष की शिकायत की भी जांच की जा रही है।

उधर हरिद्वार नगर कोतवाली पुलिस ने चेकिंग अभियान के दौरान नकली नोटों की खेप के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सरजीत सिंह, टिंकू, संजीव कुमार और सुमित कुमार के रूप में हुई है, जो पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले हैं।

पुलिस ने इनके कब्जे से 500-500 रुपये के 169 नकली नोट, कुल 84,500 रुपये बरामद किए। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने 20 हजार रुपये देकर एक लाख रुपये की जाली करेंसी खरीदी थी और हरिद्वार के बाजारों में उसे खपाने की योजना बनाई थी।

पुलिस के अनुसार कुछ नकली नोट बाजार में चलाए भी जा चुके हैं। मामले में मुख्य सप्लायर की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

इधर उत्तराखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने 16 वर्ष पुराने प्लॉट विवाद में दिल्ली निवासी इंदु बाला सतीजा के पक्ष में फैसला सुनाया है।

प्राधिकरण ने समिया इंटरनेशनल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड को 45 दिनों के भीतर दो प्लॉटों का कब्जा देने, बिक्री विलेख निष्पादित करने तथा वर्ष 2013 से अब तक की देरी पर 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है।

रेरा ने माना कि खरीदार द्वारा पूरा भुगतान किए जाने और ‘नो ड्यूज‘ प्रमाणपत्र जारी होने के बावजूद कब्जा न देना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। यदि निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया तो बिल्डर को वास्तविक कब्जा मिलने तक अतिरिक्त विलंब ब्याज भी देना होगा।