बिग ब्रेकिंग: RTI आवेदन पर ₹9,100 की मांग से मचा बवाल, कटघरे में लोक सूचना अधिकारी

RTI आवेदन पर ₹9,100 की मांग से मचा बवाल,
कटघरे में लोक सूचना अधिकारी

हल्द्वानी/अल्मोड़ा। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के एवज में ₹9,100 शुल्क मांगने को लेकर अल्मोड़ा दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के लोक सूचना अधिकारी (PIO) विवादों में घिर गए हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता हेमन्त सिंह गौनिया ने इसे कानून की भावना के विपरीत बताते हुए प्रथम अपील दायर कर दी है। मामले में राहत न मिलने पर उत्तराखण्ड राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

गौनिया के अनुसार उन्होंने संघ से 10 बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थीं, लेकिन प्रत्येक बिंदु का पृथक उत्तर देने के बजाय विभाग ने 4550 पृष्ठों का हवाला देते हुए ₹2 प्रति पृष्ठ की दर से कुल ₹9,100 जमा कराने का पत्र जारी कर दिया।

19 जून 2026 को जारी पत्र संख्या 1132/सूचना का अधिकार–पत्र0/2026-27 में कहा गया कि मांगी गई सूचना 4550 पृष्ठों में उपलब्ध है और उसकी प्रतिलिपि उपलब्ध कराने के लिए ₹9,100 शुल्क जमा कराना होगा।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि शुल्क प्राप्त होने के बाद ही सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी तथा शुल्क जमा होने तक निर्धारित समय-सीमा की गणना नहीं होगी।

अपील में उठाए गए प्रमुख सवाल

हेमन्त सिंह गौनिया ने प्रथम अपील में कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

  • आवेदन के प्रत्येक बिंदु पर अलग-अलग उत्तर नहीं दिया गया।
  • यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-सी सूचना कितने पृष्ठों की है।
  • अभिलेखों के निरीक्षण (Inspection) का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया।
  • डिजिटल रूप में उपलब्ध सूचनाओं को भी हजारों पृष्ठों का बताकर शुल्क मांगना अनुचित है।
  • जिन सूचनाओं का अभिलेख उपलब्ध नहीं है, उनके संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
  • सभी प्रश्नों पर अलग-अलग निर्णय लेने के बजाय एकमुश्त शुल्क मांगना आरटीआई की मंशा के विपरीत है।

निःशुल्क सूचना उपलब्ध कराने की मांग

अपीलकर्ता ने मांग की है कि समस्त सूचना प्रश्नवार, प्रमाणित एवं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। साथ ही लोक सूचना अधिकारी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया की जांच कर आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

सूचना आयोग में दण्डात्मक कार्रवाई की तैयारी

गौनिया ने कहा कि यदि प्रथम अपील में भी उचित राहत नहीं मिलती है तो वे उत्तराखण्ड राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर करेंगे। उनकी मांग होगी कि,

  • आरटीआई अधिनियम की धारा 20 के तहत संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर दण्ड लगाया जाए।
  • गलत प्रक्रिया अपनाने और सूचना उपलब्ध कराने में बाधा उत्पन्न करने के मामले की जांच हो।
  • विलम्ब और कथित अनियमितता के लिए आर्थिक दण्ड निर्धारित किया जाए।
  • समस्त सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।

    गौनिया का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

ऐसे में अत्यधिक शुल्क मांगकर सूचना प्राप्ति को कठिन बनाना नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करता है। अब इस मामले पर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर सूचना आयोग के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।