बिग ब्रेकिंग: हाईकोर्ट में बड़े फैसलों का दिन। हत्याकांड, पेंशन, छात्रों और गुंडा एक्ट पर अहम आदेश

हाईकोर्ट में बड़े फैसलों का दिन। हत्याकांड, पेंशन, छात्रों और गुंडा एक्ट पर अहम आदेश

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कई चर्चित मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए। नानकमत्ता डेरा प्रमुख बाबा तरसेम हत्याकांड के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज करने से लेकर पंतनगर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन रिकवरी, बीपीटी छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अंतरिम राहत और एटीएस सोसाइटी से जुड़े गुंडा एक्ट मामले में अदालत ने अहम टिप्पणियां कीं।

नानकमत्ता डेरा साहिब के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट ने आरोपी दिलबाग सिंह की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। एकलपीठ के समक्ष विपक्षी पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित कई अहम साक्ष्य पेश किए।

अदालत को बताया गया कि आरोपी और उसके साथी बुलेट मोटरसाइकिल पर घटनास्थल पर पहुंचे थे और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए थे। गौरतलब है कि 28 मार्च 2024 को उधम सिंह नगर जिले के नानकमत्ता स्थित डेरा साहिब के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

वहीं, पंतनगर विश्वविद्यालय से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के मुख्य कोषाधिकारी और निदेशक को आदेश दिया है कि सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन से की गई रिकवरी की राशि आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए।

पंतनगर विश्वविद्यालय सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2016 में हुए कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली बिना पक्ष सुने शिक्षकों की पेंशन से की गई, जो सरकारी अधिसूचनाओं और नियमों के विपरीत है। इस मामले में 77 सेवानिवृत्त शिक्षकों ने रिकवरी आदेश को चुनौती दी थी।

इसी क्रम में बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी) कोर्स के 301 छात्रों को भी हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने संबंधित विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि छात्रों को अंतरिम रूप से प्रथम वर्ष की परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय की अनुमति के बिना इन छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। छात्रों का कहना था कि संस्थान की संबद्धता को लेकर विवाद के कारण उन्हें परीक्षा से वंचित किया जा रहा था।

उधर, बहुचर्चित एटीएस सोसाइटी और गुंडा एक्ट मामले में हाईकोर्ट ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल को दिए गए संरक्षण आदेश की सीमा स्पष्ट कर दी है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की अदालत ने कहा कि 21 मई 2026 को दिया गया “नो कोर्सिव एक्शन” आदेश आयुक्त के समक्ष लंबित अपील की कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेगा और न ही प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने से रोकेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयुक्त इस मामले में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि इस मामले से संबंधित विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, जिस पर नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 के लिए निर्धारित की गई है।

वहीं, डांडा लाखौंड स्थित विवादित परियोजना के सीलिंग आदेश को हस्तक्षेपकर्ताओं के आश्वासन के बाद वापस लेने का निर्देश दिया गया है, हालांकि एमडीडीए की जांच जारी रहेगी।

हाईकोर्ट के इन फैसलों ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका न केवल गंभीर आपराधिक मामलों में सख्त रुख अपना रही है, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों, छात्रों के भविष्य और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।