बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड हाईकोर्ट में तीन अहम मामलों पर सुनवाई, सरकार और विभागों से मांगा जवाब

उत्तराखंड हाईकोर्ट में तीन अहम मामलों पर सुनवाई, सरकार और विभागों से मांगा जवाब

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। इनमें अभियोजन निदेशक के पद पर नियुक्ति, बागेश्वर में खड़िया खनन विवाद और नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण से जुड़ी जनहित याचिका शामिल हैं।

कोर्ट ने विभिन्न मामलों में राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई की तिथियां निर्धारित की हैं।

अभियोजन निदेशक की नियुक्ति पर सरकार से जवाब तलब

अभियोजन निदेशक के पद पर पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता केशर सिंह चौहान ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य गठन के बाद से अब तक अभियोजन निदेशक के पद पर पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती रही है, जबकि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 20 के तहत इस पद पर सेवानिवृत्त सत्र न्यायाधीश या कम से कम 15 वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिवक्ता की नियुक्ति का प्रावधान है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि अभियोजन विभाग को पुलिस से स्वतंत्र रखा जाना चाहिए, ताकि जांच और अभियोजन की निष्पक्षता बनी रहे।

खड़िया खनन विवाद में कोर्ट ने मांगा आधार

बागेश्वर के भैरू चौबट्टा क्षेत्र में खड़िया खनन से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह किस आधार पर खनन कार्य कर रहे हैं। कोर्ट ने इस संबंध में 15 जुलाई तक स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही राज्य सरकार को खनन नीति पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने सचिव खनन, निदेशक खनन और जिला खनन अधिकारी को 15 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता नवीन कुमार का दावा है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से खनन की अनुमति प्राप्त है, लेकिन जिला खनन अधिकारी उन्हें कार्य नहीं करने दे रही हैं। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि सभी संबंधित आदेशों की सूचना विधिवत भेजी गई थी और वर्तमान में खनन की अनुमति नहीं है।

नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर प्लास्टिक प्रदूषण पर सख्त रुख

नैनीताल से कालाढूंगी तक सड़क किनारे संचालित फड़, खोखे, दुकानों, होमस्टे और होटलों से निकलने वाले प्लास्टिक एवं अन्य कचरे के निस्तारण को लेकर दायर जनहित याचिका पर भी हाईकोर्ट ने सुनवाई की।

खंडपीठ ने नैनीताल नगर पालिका को निर्देश दिया कि सड़क किनारे संचालित व्यवसायों के लिए वेंडर जोन नीति तैयार कर कोर्ट में पेश की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों की आजीविका भी प्रभावित न हो।

कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि प्लास्टिक कचरे के निस्तारण और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होगी।

डायनेस्टी होटल को नहीं मिली राहत

सुनवाई के दौरान डायनेस्टी होटल प्रबंधन ने होटल खोलने की अनुमति मांगी। उनका कहना था कि उन्होंने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी मानकों का पालन कर लिया है। हालांकि कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने को कहा।