उत्तराखंड में टैक्सी संचालन पर सवाल! थराली-देहरादून किराया बढ़ा, पूर्णागिरी मेले में ओवरलोडिंग और अव्यवस्था से यात्री परेशान
देहरादून। उत्तराखंड में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। चमोली जिले में थराली-देहरादून मार्ग पर टैक्सी किराये में कथित बढ़ोतरी और चम्पावत जिले के टनकपुर में चल रहे पूर्णागिरी मेले के दौरान टैक्सी वाहनों की ओवरलोडिंग एवं अव्यवस्था ने परिवहन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
चमोली जिले के थराली क्षेत्र से देहरादून के लिए संचालित कमर्शियल वाहनों का किराया हाल ही में 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति यात्री किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में नई किराया सूची भी प्रसारित की जा रही है। हालांकि परिवहन विभाग की ओर से किराया वृद्धि को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कोरोना महामारी से पहले थराली-देहरादून मार्ग का किराया करीब 600 रुपये था, जो बाद में बढ़कर 800 और फिर 1000 रुपये तक पहुंचा। अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का हवाला देते हुए किराया 1200 रुपये वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चमोली के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) अभिषेक भटगाई ने स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग ने किसी भी मार्ग का किराया नहीं बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों से टैक्सी संचालकों द्वारा निर्धारित दरों से अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। विभाग टैक्सी यूनियनों के साथ वार्ता कर निर्धारित किराया सूची का पालन सुनिश्चित करेगा।
यदि कोई वाहन संचालक बिना अनुमति मनमाने ढंग से किराया वसूलता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इधर, उत्तर भारत के प्रसिद्ध मां पूर्णागिरी मेले के दौरान टनकपुर क्षेत्र में टैक्सी वाहनों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के आगमन के बीच टैक्सी चालक निर्धारित स्टैंड के बजाय विभिन्न स्थानों पर वाहन रोककर सवारियां भर रहे हैं। इसके साथ ही कई वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि ओवरलोडिंग और अव्यवस्थित संचालन से न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बनी हुई है।
एक ओर जहां थराली-देहरादून मार्ग पर किराया वृद्धि की वैधता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्णागिरी मेले में परिवहन नियमों के पालन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हुई हैं।
अब देखना होगा कि यात्रियों के हितों की रक्षा और परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।

