एक्सक्लूसिव: मौतों के आंकड़े और बजट की जानकारी नहीं मिली, AIIMS के खिलाफ CIC में द्वितीय अपील

मौतों के आंकड़े और बजट की जानकारी नहीं मिली, AIIMS के खिलाफ CIC में द्वितीय अपील

नई दिल्ली। देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में रखरखाव बजट, मरीजों की मौतों के आंकड़े, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ी सूचनाएं समय पर और पूर्ण रूप से उपलब्ध न कराए जाने का आरोप लगाते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया ने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की है।

जानकारी के अनुसार, हेमंत गौनिया ने 9 मार्च 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत आवेदन देकर एम्स और उससे जुड़े संस्थानों में रखरखाव पर होने वाले खर्च, अस्पतालों में हुई मौतों के आंकड़े, मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और विभिन्न प्रशासनिक मामलों से संबंधित जानकारी मांगी थी।

आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर मांगी गई सूचनाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसके बाद उन्होंने प्रथम अपील दायर की।

प्रथम अपील के संबंध में एम्स नई दिल्ली के आरटीआई प्रकोष्ठ ने 26 मई 2026 को पत्र जारी कर विभिन्न विभागों द्वारा सूचना उपलब्ध कराने का दावा किया और मामले को एम्स बल्लभगढ़, हरियाणा के प्रथम अपीलीय अधिकारी को अग्रेषित कर दिया।

हालांकि हेमंत गौनिया का कहना है कि अब तक मांगी गई सूचना अभिलेखीय प्रमाणों और प्रमाणित दस्तावेजों सहित उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनके अनुसार संबंधित विभागों ने केवल पत्राचार के माध्यम से सूचना देने का दावा किया, जबकि स्पष्ट और प्रमाणित जवाब नहीं दिए गए।

धारा 19(3) के तहत दायर की द्वितीय अपील

इसी आधार पर हेमंत गौनिया ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(3) के तहत केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की है।

अपील में आयोग से मांग की गई है कि संबंधित लोक सूचना अधिकारियों को समस्त अभिलेखीय सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं और सूचना देने में हुई देरी, लापरवाही तथा अपूर्ण सूचना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ धारा 20 के तहत कार्रवाई की जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की भी मांग

द्वितीय अपील में आयोग से मामले की सुनवाई निर्धारित करने तथा अपीलकर्ता को व्यक्तिगत अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखने का अवसर देने की मांग भी की गई है।

साथ ही यदि आवश्यक हो तो स्वतंत्र जांच कराए जाने और सूचना प्राप्ति में हुई कथित मानसिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक क्षति के लिए प्रतिकर प्रदान करने का अनुरोध भी किया गया है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर सार्वजनिक धन से संचालित बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में खर्च होने वाले बजट, मरीजों की सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मृत्यु संबंधी आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

माना जा रहा है कि केंद्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जा सकता है।