बिग ब्रेकिंग: मानसून से पहले अलर्ट मोड पर देहरादून, डीएम ने 7 दिन में मांगा विभागों से माइक्रो प्लान

मानसून से पहले अलर्ट मोड पर देहरादून, डीएम ने 7 दिन में मांगा विभागों से माइक्रो प्लान

  • लापरवाही पर होगी कार्रवाई, जलभराव, भूस्खलन और राहत-बचाव तैयारियों की समीक्षा

देहरादून। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन तैयारियों को लेकर सभी विभागों को अलर्ट मोड पर कर दिया है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप जमीनी स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करे।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों से सात दिनों के भीतर विस्तृत माइक्रो प्लान प्रस्तुत करने को कहा है। डीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि मानसून अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और राहत एवं बचाव कार्यों में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में प्रमुख निर्देश

नगर निकायों को निर्देश

  • सभी नदी-नालों एवं जल निकासी तंत्र की युद्धस्तर पर सफाई।
  • 7 दिनों के भीतर सफाई अभियान पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
  • जलभराव प्रभावित क्षेत्रों के लिए टास्क फोर्स और कंट्रोल रूम स्थापित करना।
  • नालों की सफाई की दैनिक प्रगति रिपोर्ट देना।

तहसील एवं प्रशासनिक स्तर पर

  • संभावित संपर्क-विहीन गांवों की सूची तैयार करना।
  • जलभराव और आपदा प्रभावित स्थलों का चिन्हीकरण।
  • त्वरित राहत एवं बचाव के लिए क्यूआरटी (Quick Response Team) का गठन।
  • नदी किनारे बसे गांवों के लिए अलग सुरक्षा योजना तैयार करना।

सड़क एवं राजमार्ग विभागों के लिए

  • सभी लैंडस्लाइड जोन का पुनः सत्यापन।
  • संवेदनशील मार्गों पर मशीनरी और मानव संसाधन की अग्रिम तैनाती।
  • जेसीबी ऑपरेटरों और मशीनरी का डाटा तैयार करना।
  • वैकल्पिक मार्गों का पूर्व चिन्हीकरण।
  • बंद मार्गों को शीघ्र खोलने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश

  • संवेदनशील क्षेत्रों में गर्भवती एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं का चिन्हीकरण।
  • सुरक्षित प्रसव के लिए समयपूर्व स्थानांतरण योजना तैयार करना।
  • डेंगू और मलेरिया नियंत्रण के लिए 7 दिन में माइक्रो प्लान देना।
  • फीवर क्लीनिक, जांच और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करना।

शिक्षा विभाग को निर्देश

  • ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार करना जहां पहुंचने में नदी-नाले या भूस्खलन क्षेत्र आते हैं।
  • आपदा के दौरान वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था विकसित करना।
  • जरूरत पड़ने पर शिक्षकों को गांवों में जाकर पढ़ाई कराने की व्यवस्था बनाना।

बिजली और पेयजल विभाग

  • जर्जर बिजली पोल और झूलती तारों की मरम्मत।
  • ट्रांसफार्मरों के आसपास पेड़ों की कटाई-छंटाई।
  • पेयजल लाइनों की सुरक्षा और आपदा के बाद त्वरित बहाली की योजना तैयार करना।
  • पुलों का होगा सेफ्टी ऑडिट

जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, राष्ट्रीय राजमार्ग और पीएमजीएसवाई को सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने तथा जिन पुलों पर सुरक्षा कार्य आवश्यक हैं उन्हें मानसून से पहले पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही नदियों और गदेरों में ड्रेजिंग कार्य को भी प्राथमिकता देने को कहा गया।

पर्यटन स्थलों पर बढ़ेगी निगरानी

पर्यटन विभाग को संवेदनशील स्थलों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं बीएसएनएल को आपदा के दौरान संचार व्यवस्था सुचारू रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन मुद्दों पर भी हुई समीक्षा

बैठक में निम्न महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई

  • शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या
  • आपदा शिकायतों का त्वरित निस्तारण
  • आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन के लंबित मामले
  • मसूरी के लंढौर बाजार में भू-धंसाव
  • खाद्य सामग्री एवं ईंधन की उपलब्धता
  • पशु चारा बैंक की व्यवस्था

सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों के साथ समन्वय

डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए मानसून से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी करें, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके और राहत-बचाव कार्य प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।