खास खबर: कौन थे दून के पहले डीएम? 66वें जिलाधिकारी बने आशीष चौहान, जानिए राजधानी की प्रशासनिक विरासत

कौन थे दून के पहले डीएम? 66वें जिलाधिकारी बने आशीष चौहान, जानिए राजधानी की प्रशासनिक विरासत

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को नया जिलाधिकारी मिल गया है। वर्ष 2012 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने देहरादून के 66वें जिलाधिकारी के रूप में पदभार संभाल लिया है।

उन्होंने 2009 बैच के आईएएस अधिकारी सविन बंसल का स्थान लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद आशीष चौहान ने स्पष्ट कहा कि उनकी प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाना और भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना होगी।

देहरादून में जिलाधिकारी का पद हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। राजधानी होने के कारण यहां का डीएम केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं बल्कि पूरे जिले की कानून व्यवस्था, विकास योजनाओं, आपदा प्रबंधन और जनहित से जुड़े बड़े फैसलों का केंद्र होता है। ऐसे में नए डीएम की नियुक्ति के साथ ही दून के प्रशासनिक इतिहास की चर्चा भी तेज हो गई है।

1935 में मिला था दून को पहला जिलाधिकारी

ब्रिटिश शासनकाल में देहरादून पहले सहारनपुर जिले का हिस्सा था। वर्ष 1871 में इसे अलग जिले के रूप में पहचान मिली, लेकिन यहां जिलाधिकारी व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 1935 में हुई।

26 अक्टूबर 1935 को बीजीके हलोवस को देहरादून का पहला जिला अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। वे मार्च 1937 तक इस पद पर रहे।

तब से लेकर अब तक देहरादून को 65 जिलाधिकारी मिल चुके हैं और अब डॉ. आशीष चौहान 66वें डीएम बने हैं।
उत्तराखंड बनने से पहले 43 डीएम रहे तैनात
उत्तराखंड राज्य गठन से पहले तक देहरादून में कुल 43 जिलाधिकारी तैनात रहे।

09 नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड अलग राज्य बना तो निवेदिता शुक्ला वर्मा राजधानी देहरादून की पहली जिलाधिकारी बनीं। राज्य गठन के बाद अब तक दून को 22 जिलाधिकारी मिल चुके हैं।

अगर औसत देखा जाए तो राजधानी में एक डीएम का कार्यकाल करीब एक वर्ष के आसपास ही रहा है। प्रशासनिक जानकार मानते हैं कि किसी जिले की जमीनी समस्याओं को समझने और लंबे समय की योजनाओं को लागू करने के लिए यह अवधि काफी कम मानी जाती है।

आईसीएस से आईएएस तक का सफर

आजादी से पहले जिलाधिकारी की जिम्मेदारी इंडियन सिविल सर्विस यानी आईसीएस अधिकारियों को दी जाती थी। यह ब्रिटिश शासनकाल की सबसे प्रतिष्ठित सेवा मानी जाती थी। वर्ष 1950 में संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी के गठन के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस व्यवस्था लागू हुई।

देहरादून में वर्ष 1951 के बाद आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति शुरू हुई और वीसी शर्मा दून के पहले आईएएस जिलाधिकारी बने।

मुख्य सचिव तक पहुंचे कई पूर्व डीएम

देहरादून में जिलाधिकारी रह चुके कई अधिकारी बाद में प्रदेश के मुख्य सचिव भी बने। इनमें एसके दास, ओम प्रकाश और वर्तमान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी प्रमुख नाम हैं। इससे यह साफ होता है कि राजधानी दून का डीएम पद प्रशासनिक दृष्टि से कितना अहम माना जाता है।

कौन हैं नए डीएम डॉ. आशीष चौहान?

राजस्थान मूल के डॉ. आशीष चौहान अपनी जमीनी कार्यशैली और सख्त प्रशासनिक छवि के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने इतिहास विषय में बीए, बीएड, एमए और पीएचडी तक की शिक्षा हासिल की है।

उत्तराखंड कैडर में आने के बाद उन्होंने नैनीताल और चमोली में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया। इसके बाद उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और पौड़ी जैसे जिलों में डीएम रहते हुए उन्होंने आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास और पर्यटन क्षेत्र में कई पहल कीं।

उत्तरकाशी में वर्ष 2018 के दौरान एक विदेशी पर्वतारोही के रेस्क्यू और उपचार में उनकी भूमिका काफी चर्चित रही थी। वहीं पौड़ी में गांव आधारित पर्यटन और पुराने चारधाम पैदल मार्गों के पुनर्जीवन पर उनके काम की काफी सराहना हुई।

राजधानी में होंगी कई बड़ी चुनौतियां

देहरादून इस समय ट्रैफिक जाम, अवैध निर्माण, अतिक्रमण, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की धीमी गति और बढ़ते शहरी दबाव जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके अलावा भूमाफियाओं की सक्रियता और कानून व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

ऐसे में नए डीएम आशीष चौहान के सामने राजधानी की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। प्रशासनिक गलियारों में उनकी नियुक्ति को सरकार की महत्वपूर्ण रणनीतिक तैनाती के रूप में देखा जा रहा है।