NGT गाइडलाइन दरकिनार, पिंडर नदी में मशीनों का कब्जा
रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में संचालित मेलखेत हाइड्रो प्रोजेक्ट पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर विवादों में आ गया है।
परियोजना क्षेत्र में पिंडर नदी के भीतर भारी मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर खनन किए जाने का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में आठ से अधिक पोकलैंड मशीनें लगातार नदी के भीतर आरबीएम (रेत, बजरी और पत्थर) निकालने में लगी हुई हैं।
जबकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देश नदी क्षेत्रों में सीमित और नियंत्रित खनन की अनुमति देते हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर भारी मशीनों से अंधाधुंध खनन किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल पिंडर नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ गंभीर छेड़छाड़ हो रही है।
नदी के बहाव क्षेत्र को बदला जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। लगातार हो रही खुदाई से नदी तटों पर कटाव तेज हो रहा है और आसपास के भूभाग पर भी संकट गहराने लगा है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल भारी मशीनों के संचालन की अनुमति को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों ने पूछा है कि क्या इन मशीनों के संचालन के लिए विधिवत अनुमति ली गई है?
यदि अनुमति दी गई है तो क्या निर्धारित प्रतिभूति राशि जमा कराई गई है? साथ ही क्या खनन क्षेत्र का सीमांकन किया गया है या बिना तय सीमा के खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं?
स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि परियोजना क्षेत्र से प्रतिदिन लाखों टन आरबीएम निकाला जा रहा है, लेकिन सरकार को मिलने वाले राजस्व का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा रहा।
उनका कहना है कि विभागीय रिकॉर्ड में सीमित रॉयल्टी दिखाई जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां चल रही हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि नदी के भीतर इसी तरह भारी मशीनों से खनन जारी रहा तो भविष्य में पिंडर नदी के अस्तित्व पर खतरा खड़ा हो सकता है।
उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से जलीय जीवन, भू-जल स्तर और आसपास की पारिस्थितिकी पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
इधर पूरे मामले में जिला प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि प्रशासन की जानकारी में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
अब निगाहें प्रशासन और खनन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

