चारधाम यात्रा 2026: CEO नियुक्ति, बढ़ती भीड़, सियासत तेज और गंगोत्री में प्रदूषण
देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 के शुभारंभ के साथ ही प्रदेश में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा है। यात्रा के शुरुआती दिनों में ही लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने से जहां व्यवस्थाओं की वास्तविक परीक्षा हो रही है।
वहीं सरकार ने भी तेजी से प्रशासनिक निर्णय लेते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति कर दी है।
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार पीसीएस अधिकारी सोहन सिंह को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें उनकी पूर्व जिम्मेदारियों से मुक्त कर पूर्णकालिक रूप से तैनात किया गया है।
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे थे और यह पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार में संचालित हो रहा था।
चारधाम यात्रा के तहत केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, यात्रा के पहले कुछ दिनों में ही केदारनाथ में 90 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं, जबकि चारों धामों में कुल संख्या 1.80 लाख के पार जा चुकी है।
इतनी बड़ी संख्या के कारण दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर दबाव साफ नजर आ रहा है। कई स्थानों पर लंबी कतारें और इंतजार की स्थिति सामने आई है, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
इसी बीच गंगोत्री धाम से पर्यावरण को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। भागीरथी नदी में श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के नाम पर कपड़े, साड़ियां और पूजा सामग्री प्रवाहित की जा रही है, जिससे नदी प्रदूषित हो रही है।
गंगा विचार मंच द्वारा चलाए गए विशेष स्वच्छता अभियान में नदी से सैकड़ों बोरे कपड़े और अन्य सामग्री निकाली गई। संगठन और प्रशासन लगातार तीर्थ यात्रियों से अपील कर रहे हैं कि वे धार्मिक आस्था को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखें।
चारधाम यात्रा को लेकर सियासी माहौल भी गर्म होता जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यात्रा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, भीड़ प्रबंधन की विफलता और वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दुष्प्रचार बताया है। सरकार का कहना है कि यात्रा पूरी तरह नियंत्रण में है और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कई वीडियो भ्रामक हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यात्रा को लेकर किसी भी तरह की गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और 24 घंटे निगरानी रखी जाए।
वहीं मौसम ने भी यात्रा के बीच अचानक करवट ली है। चमोली जिले के बदरीनाथ क्षेत्र में हल्की बारिश और ऊंची चोटियों पर बर्फबारी दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई है और श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिली है।
इसके अलावा रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के रक्षक देवता माने जाने वाले भकुंट भैरवनाथ मंदिर के कपाट भी विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं, जिससे धार्मिक गतिविधियों को और गति मिली है।
चारधाम यात्रा 2026 जहां एक ओर आस्था और धार्मिक उत्साह का प्रतीक बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर यह प्रशासनिक तैयारियों, पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक संतुलन की भी बड़ी परीक्षा साबित हो रही है।
आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना के बीच सरकार और प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को सुचारू, सुरक्षित और संतुलित बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

