केदारनाथ धाम के कपाट खुले, फूलों की भव्य सजावट और पुष्पवर्षा के बीच शुरू हुई यात्रा
देहरादून। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 के तहत आज चौथे दिन बुधवार सुबह 8 बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट विधिवत खोल दिए गए। वैदिक परंपराओं और धार्मिक विधि-विधान के बीच धाम में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
विधिवत पूजा के साथ खुले कपाट
कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले मंदिर का पूर्व द्वार खोला गया। इसके बाद मुख्य पुजारी, रावल और हक-हकूकधारियों ने गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना शुरू की।
इस दौरान मंदिर परिसर में वेद मंत्रों की गूंज के बीच भगवान केदारनाथ की विशेष पूजा की जा रही है।
51 क्विंटल फूलों से सजा धाम, सेना ने की पुष्पवर्षा
कपाट खुलने के मौके पर मंदिर को करीब 51 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया।
वहीं, भारतीय सेना के हेलिकॉप्टर द्वारा धाम में पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया।
पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं के दर्शन का अनुमान
प्रशासन के अनुसार पहले दिन 8 से 10 हजार श्रद्धालुओं के दर्शन करने का अनुमान है। यात्रा की शुरुआत के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके हैं।
मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी, पीएम के नाम पहली पूजा
इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम में मौजूद रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की पहली पूजा अर्पित की।
यात्रा में सख्त नियम लागू
इस बार चारधाम यात्रा में नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।
- मंदिर परिसर के 50-60 मीटर दायरे में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित
- फोटोग्राफी के लिए अलग स्थान निर्धारित
- मुख्य मंदिर परिसर में रील, फोटो और वीडियो बनाना पूरी तरह बैन
- मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील की है।
विशेष पूजा के बाद ही आम दर्शन
कपाट खुलने के बाद फिलहाल मुख्य पुजारी टी. गंगाधर लिंग और हक-हकूकधारी विशेष पूजा और वेद पाठ कर रहे हैं। पूजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोले जाएंगे।
भस्म प्रसाद का विशेष महत्व
कपाट बंद करने से पहले भगवान केदारनाथ के ज्योतिर्लिंग पर लगाई गई भस्म को हटाया जाएगा। यही पवित्र भस्म श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित की जाएगी, जिसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
चारधाम यात्रा के इस शुभारंभ के साथ ही उत्तराखंड में आस्था, पर्यटन और आध्यात्मिक ऊर्जा का नया अध्याय शुरू हो गया है।

