उत्तराखंड के जंगलों पर कब्जा। 4 साल में भी नहीं थमा अतिक्रमण का खेल
देहरादून। उत्तराखंड में रिजर्व फॉरेस्ट भूमि पर अवैध कब्जे लगातार गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। चार साल से चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियानों के बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 70 से 80 प्रतिशत वन भूमि आज भी अतिक्रमण की चपेट में है।
11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर कब्जा
वन विभाग के अनुसार, प्रदेश में कुल 11,396.63 हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट भूमि पर अतिक्रमण दर्ज है। इनमें से करीब 9,836 हेक्टेयर क्षेत्र अभी भी कब्जे में है।
पिछले चार वर्षों में महज 1,560.31 हेक्टेयर भूमि को ही अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सका है, जो कुल क्षेत्रफल की तुलना में काफी कम है।
तराई क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
कुमाऊं का तराई इलाका अतिक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
- तराई ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन: 5,982 हेक्टेयर पर कब्जा
- तराई वेस्ट फॉरेस्ट डिवीजन: 2,629 हेक्टेयर पर कब्जा
समतल और उपजाऊ जमीन के कारण यहां अतिक्रमण की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं।
कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी
अतिक्रमण हटाने की गति चिंता का विषय बनी हुई है।
- तराई ईस्ट में सिर्फ 214 हेक्टेयर भूमि खाली
- तराई वेस्ट में 558.96 हेक्टेयर भूमि मुक्त
अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति बेहतर नहीं:
- बदरीनाथ डिवीजन: 937 में से 247.55 हेक्टेयर मुक्त
- देहरादून डिवीजन: 593 में से सिर्फ 26.35 हेक्टेयर खाली
कोर्ट केस बने बड़ी बाधा
अतिक्रमण हटाने में सबसे बड़ी अड़चन न्यायालयों में लंबित मामले हैं। कई कब्जाधारियों ने अदालत का रुख किया है, जिससे विभाग की कार्रवाई प्रभावित हो रही है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में वर्षों तक निर्णय नहीं हो पाता।
AI तकनीक से निगरानी की तैयारी
वन विभाग अब अतिक्रमण पर लगाम लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैकिंग सिस्टम विकसित कर रहा है।
इससे कोर्ट मामलों की डिजिटल मॉनिटरिंग, अतिक्रमण की रियल-टाइम जानकारी, कार्रवाई की प्रगति पर नजर
जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
पर्यावरण पर गहरा असर
अवैध कब्जों से जंगलों की कटाई बढ़ रही है, जिससे जैव विविधता को नुकसान, वन्यजीवों का आवास खत्म, मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि, जलवायु और जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार का बयान
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि अतिक्रमण पुराने हैं, लेकिन सरकार इन्हें हटाने के साथ नए कब्जों को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है।
वहीं, नोडल अधिकारी पराग मधुकर धकाते के मुताबिक, एआई सिस्टम से मामलों की ट्रैकिंग आसान होगी और कार्रवाई में तेजी आएगी।
उत्तराखंड में वन भूमि पर बढ़ता अतिक्रमण प्रशासन और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अगर जल्द सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की प्राकृतिक संपदा को गंभीर नुकसान हो सकता है।

