बड़ी खबर: मौसम का डबल अटैक। कहीं भूस्खलन तो कहीं बर्फबारी से अटकी चारधाम तैयारियां

मौसम का डबल अटैक। कहीं भूस्खलन तो कहीं बर्फबारी से अटकी चारधाम तैयारियां

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले मौसम लगातार चुनौती बना हुआ है। हालिया बारिश और बर्फबारी के बाद अब मौसम साफ होने पर भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने लगी हैं, जिससे यात्रा तैयारियों पर असर पड़ रहा है।

चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोविंदघाट से पहले पिनौला के पास अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा।

भूस्खलन के चलते हाईवे पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया। प्रशासन ने तत्काल मशीनें लगाकर करीब दो घंटे में मार्ग को सुचारू कर दिया।

ज्योतिर्मठ कोतवाल देवेंद्र सिंह रावत के अनुसार हाईवे अब पूरी तरह से यातायात के लिए खोल दिया गया है, लेकिन यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए।

वहीं, उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हैं।

यमुनोत्री धाम में लगातार बर्फबारी के चलते चेंजिंग रूम, रसोई घर और अस्थायी पुलिया निर्माण कार्य रुक गए हैं, जबकि पैदल मार्ग के सुधारीकरण कार्य भी ठप हैं।

तीर्थ पुरोहितों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्य पूरे नहीं किए गए तो यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विभागीय कार्यों में देरी पर भी सवाल उठाए हैं।

इसके अलावा उत्तरकाशी-भटवाड़ी मार्ग पर करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में आठ भूस्खलन जोन अब भी सक्रिय हैं, जिनका ट्रीटमेंट नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त है और पहाड़ियों पर लटके बोल्डर खतरा बने हुए हैं।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि बारिश के कारण कार्य प्रभावित हुए थे, लेकिन अब मौसम साफ होते ही सभी विभागों को तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा की शुरुआत होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे। ऐसे में प्रशासन के सामने समय रहते सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।