उत्तराखंड में अपराध से जुड़ी कई बड़ी खबरें, एक क्लिक में पढ़ें….
देहरादून। उत्तराखंड में एक के बाद एक सामने आ रही घटनाओं ने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहीं सनसनीखेज हत्याकांड में लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं, तो कहीं एक मां अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए सिस्टम से लड़ती नजर आ रही है।
देहरादून के राजपुर क्षेत्र में रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 10वें आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दो आरोपी एनकाउंटर के बाद पकड़े गए थे।
जांच में खुलासा हुआ कि बार में हुए मामूली विवाद ने फायरिंग का रूप ले लिया, जिसकी चपेट में आकर एक निर्दोष बुजुर्ग की जान चली गई।
वहीं चंपावत में इंडेन गैस एजेंसी के मैनेजर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे मानसिक दबाव की बात भी सामने आ रही है।
घटना का असर रुद्रपुर में दिखा, जहां गैस सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई और उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी।
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में 2024 में हुए सड़क हादसे में बेटे को खो चुकी मां ललिता चौधरी की जिद और संघर्ष ने सिस्टम को झकझोर दिया है।
पुलिस द्वारा फाइनल रिपोर्ट लगाए जाने के बावजूद उन्होंने खुद सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपी डंपर की पहचान की। अब एसएसपी ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।
उधर पौड़ी के श्रीनगर गढ़वाल में अलकेश्वर घाट पर एक परिवार को अपनी 19 वर्षीय बेटी के अंतिम संस्कार के लिए बेहद अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। सूखी लकड़ी की व्यवस्था न होने के कारण परिजनों को डीजल, टायर और कपड़ों का सहारा लेना पड़ा, जिससे स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
रामनगर के पीरूमदारा में तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां दो बाइकों की टक्कर में तीन युवक घायल हो गए। वहीं हरिद्वार में एक युवक की संदिग्ध मौत और दूसरे के गंगा में बह जाने की घटना ने चिंता बढ़ा दी है। पुलिस दोनों मामलों की जांच और सर्च ऑपरेशन में जुटी है।
इधर रुद्रपुर में वन विभाग ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वन भूमि पर बनी दो अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि नोटिस के बावजूद वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में सामने आई ये घटनाएं न सिर्फ कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि आम नागरिक को न्याय और बुनियादी सुविधाओं के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है।



