व्हाट्सऐप नोटिस पर गिरफ्तारी अवैध, हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी को ठहराया दोषी
- CrPC की धारा 41-A की अनदेखी पर सख्ती, अदालत ने कहा, डिजिटल मैसेज वैध कानूनी नोटिस नहीं
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्हाट्सऐप के जरिए नोटिस देकर की गई गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया है।
जस्टिस प्रवीर भटनागर की पीठ ने स्पष्ट किया कि व्हाट्सऐप या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा गया संदेश कानूनी रूप से वैध नोटिस नहीं माना जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 2021 में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत दर्ज एक FIR से जुड़ा है।
- वर्ष 2023 तक आरोपी को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया
- बाद में पुलिस ने व्हाट्सऐप के जरिए थाने में उपस्थित होने का संदेश भेजा
- आरोपी ने पत्नी की बीमारी का हवाला देकर असमर्थता जताई
इसके बावजूद पुलिस ने जवाब पर विचार किए बिना दो दिन बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और अदालत में पेश कर दिया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा,
- CrPC की धारा 41-A के तहत नोटिस निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही दिया जाना चाहिए।
- व्हाट्सऐप मैसेज वैध सेवा (Valid Service) नहीं है।
- यदि आरोपी घर पर न मिले, तो नोटिस को निवास स्थान पर चस्पा करना चाहिए था।
अदालत ने Arnesh Kumar v State of Bihar और Satender Kumar Antil v CBI का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन अनिवार्य है।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
कोर्ट ने पाया कि,
- चार्जशीट में गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं थे
- मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी
- जांच अधिकारी ने कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की
इसे अदालत ने व्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर सीधा आघात बताया।
फैसला और आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए मामले को सजा निर्धारण के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
क्या है संदेश?
यह फैसला साफ करता है कि,
- गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।
- व्हाट्सऐप या डिजिटल माध्यम कानूनी नोटिस का विकल्प नहीं हो सकते।
- पुलिस को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना ही होगा।
राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला कानून के शासन (Rule of Law) को मजबूत करने वाला माना जा रहा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि तकनीक के नाम पर कानूनी प्रक्रियाओं से समझौता नहीं किया जा सकता।




